सूरत का कपड़ा उद्योग बजट से उम्मीदें,रिसर्च एंड डेवलपमेंट और टेक्सटाइल यूनिवर्सिटी की मांग
2500 रुपये से अधिक के लहंगों पर 18% GST घटाने और स्वदेशी टेक्सटाइल मशीनरी को बढ़ावा देने की मांग

सूरत। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को देश का आम बजट पेश करने जा रही हैं। ऐसे में एशिया के सबसे बड़े कपड़ा उद्योग के रूप में पहचाने जाने वाले सूरत को इस बजट से कई बड़ी उम्मीदें हैं। सूरत का कपड़ा बाजार सालाना लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये का टर्नओवर रखता है और खास तौर पर पॉलिएस्टर सेक्टर में देश का अग्रणी केंद्र है। उद्योग संगठनों का मानना है कि यदि सरकार उनकी व्यावहारिक मांगों को स्वीकार करती है, तो सूरत का कपड़ा उद्योग वैश्विक स्तर पर चीन जैसे देशों को कड़ी टक्कर दे सकता है।

रिसर्च एंड डेवलपमेंट और टेक्सटाइल यूनिवर्सिटी की मांग
कपड़ा उद्योग के अग्रणी व्यापारियों का कहना है कि किसी भी उद्योग की प्रगति के लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और आधुनिक शिक्षा बेहद जरूरी है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए सूरत में R&D सेंटर और एक समर्पित टेक्सटाइल यूनिवर्सिटी की आवश्यकता महसूस की जा रही है। व्यापारियों ने मांग की है कि आगामी बजट में सूरत को विशेष टेक्सटाइल यूनिवर्सिटी की सौगात दी जाए, ताकि स्थानीय युवा इस उद्योग में नवाचार और रचनात्मक योगदान दे सकें।
MSME पोर्टल और आयकर कानूनों में सुधार की जरूरत
व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान में MSME पोर्टल और आयकर कानूनों की कुछ धाराएं उद्योग के लिए जटिलता पैदा कर रही हैं। विशेष रूप से धारा 43B(h) में बदलाव की मांग की गई है। उद्योग संगठनों का मानना है कि देश की विकासशील स्थिति को देखते हुए उद्यमियों और महिलाओं को प्रोत्साहन देने के लिए इन नियमों में संशोधन जरूरी है। साथ ही, जैसे आयकर प्रणाली को मजबूत बनाया गया है, उसी तरह MSME पोर्टल को भी अधिक सरल और व्यापार-अनुकूल बनाने की आवश्यकता है।
स्वदेशी टेक्सटाइल मशीनरी को बढ़ावा
‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्वदेशी’ अभियान को मजबूती देने के लिए व्यापारियों ने मांग की है कि टेक्सटाइल मशीनरी का निर्माण देश में ही हो। फिलहाल करोड़ों रुपये की मशीनरी विदेशों से आयात की जाती है। यदि स्थानीय मशीनरी निर्माताओं को सरकारी सब्सिडी दी जाए, तो भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकता है। साथ ही, नई तकनीक अपनाने के लिए विदेश यात्रा हेतु वीज़ा प्रक्रिया को सरल करने की भी मांग रखी गई है।
GST की जटिलताओं को दूर करने की अपील
GST को लेकर भी उद्योग जगत में कुछ असंतोष है। व्यापारियों का कहना है कि यदि सप्लायर टैक्स नहीं भरता, तो उसकी वसूली खरीदार से की जाती है, जो अनुचित है। इस प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की गई है।
इसके अलावा, RCM (Reverse Charge Mechanism) के तहत टैक्स नकद में जमा करने के बजाय ITC (इनपुट टैक्स क्रेडिट) से समायोजन की अनुमति दी जानी चाहिए। पैकेजिंग मटेरियल पर पुराने टैक्स रिफंड में आ रही तकनीकी दिक्कतें भी व्यापारियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं।
लहंगा उद्योग और आम उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद
सूरत का लहंगा उद्योग देशभर में प्रसिद्ध है। फिलहाल 2500 रुपये से अधिक कीमत वाले लहंगों पर 18% GST लगता है। व्यापारियों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में ₹2500 की सीमा बहुत कम है और मध्यम वर्ग के लिए शादी जैसे अवसरों पर यह टैक्स बड़ा बोझ बन जाता है। इसलिए बजट में इस सीमा को बढ़ाने या टैक्स दर घटाने की मांग जोर पकड़ रही है, जिससे व्यापारियों और ग्राहकों—दोनों को राहत मिल सके।
उद्योग की सरकार से उम्मीद
कपड़ा उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार अब तक उनकी कई मांगों पर सकारात्मक रुख दिखा चुकी है। उन्हें विश्वास है कि आगामी बजट में R&D, टेक्सटाइल यूनिवर्सिटी, MSME सुधार, स्वदेशी मशीनरी और GST सरलीकरण जैसे मुद्दों पर ठोस कदम उठाए जाएंगे। उद्योग जगत को उम्मीद है कि यह बजट सूरत के कपड़ा उद्योग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक सिद्ध होगा।



