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गोपियों के जीवन में प्रतिदिन छहों ऋतुएं अनुभव होती हैं : स्वामी डॉ. श्री राजेंद्र दास देवाचार्य जी महाराज

श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में महाराजजी ने मकर संक्रांति, षटतिला एकादशी और गोवर्धन-गोचारण लीला का किया भावपूर्ण वर्णन

सूरत शहर के वेसू क्षेत्र में श्री कामधेनु मैदान, क्रोमा के सामने, नेक्सा शोरूम के पास वीआईपी रोड सूरत में श्री जड़खोर गोधाम गौशाला के सेवित गोवंश के संरक्षण एवं सेवा के पावन उद्देश्य से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ रही। कथा के आयोजन से पूरा वातावरण भक्तिरस से सराबोर नजर आया।

कथा के मनोरथी श्रीमती गीतादेवी गजानंद कंसल परिवार के राकेश कंसल एवं प्रमोद कंसल (सपत्नी) व्यासपीठ का विधिवत पूजन किया गया। व्यासपीठ से परम गौ उपासक, करुणामय, वेदज्ञ एवं निर्मल हृदय अनंत श्रीविभूषित श्रीमज्जगद्गुरु द्वाराचार्य अग्र पीठाधीश्वर एवं मलूक पीठाधीश्वर स्वामी डॉ. श्री राजेंद्र दास देवाचार्य जी महाराज (श्री रैवासा-वृंदावन धाम) ने श्रीमद्भागवत महात्म्य, मकर संक्रांति, षटतिला एकादशी, गोवर्धन तथा भगवान श्रीकृष्ण की गोचारण लीला पर विस्तार से प्रकाश डाला।

महाराज श्री ने कहा कि इस वर्ष लगभग 30-35 वर्षों के बाद मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी सहित अनेक दुर्लभ और पुण्यदायी संयोग बन रहे हैं। मकर संक्रांति जहां अक्षय पुण्य प्रदान करने वाली है, वहीं षटतिला एकादशी संपूर्ण पापों का नाश करने वाली मानी जाती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि इस महासंयोग पर तिल का दान अवश्य करें। साथ ही मकर संक्रांति के दिन अन्न का संकल्प लेकर द्वादशी के दिन अन्नदान करने का भी महत्व बताया।

वृंदावन की महिमा का वर्णन करते हुए महाराजजी ने कहा कि जहां भगवान बलभद्र के साथ प्रकट हुए हैं, वहां ऋतुराज बसंत सदैव निवास करते हैं और वहां बारहों महीने एक समान बसंत ऋतु बनी रहती है। वृंदावन की महिमा ऐसी है कि गोपियों के जीवन में प्रतिदिन छहों ऋतुएं अनुभव होती हैं। आधुनिक विकास के बावजूद आज भी वृंदावन की अलौकिकता अक्षुण्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि संत और देवता सर्वज्ञ होते हुए भी सीमित सर्वज्ञता रखते हैं, जबकि भगवान की सर्वज्ञता असीमित है। भगवान हर समय, हर स्थान पर और प्रत्येक घट-घट में विद्यमान हैं।

श्री जड़खोर गोधाम गौशाला समिति, सूरत शाखा के प्रमुख कैलाश अग्रवाल एवं मीडिया प्रभारी सज्जन महर्षि ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के प्रथम दिन सोमवार को जे.पी. अग्रवाल, अनिल अग्रवाल (रचना ग्रुप), विनोद अग्रवाल (लक्ष्मीहरि), जुगल अग्रवाल (अल्फा), आनंद खेतान, बालकिशन अग्रवाल (सीए), राहुल अग्रवाल (सीए), अजय गुप्ता, शैलेशभाई सेलर एवं परमेश गोयल ने महाराजश्री का अभिवादन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम का संचालन योगेन्द्र शर्मा ने किया।

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