
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चेक ट्रंकेशन सिस्टम (CTS) के तहत लागू किए जाने वाले Continuous Clearing and Settlement (CCS) फ्रेमवर्क के फेज-2 को फिलहाल स्थगित कर दिया है। इसके साथ ही चेक क्लीयरिंग से जुड़ा 3 घंटे में चेक क्लीयर करने का सख्त नियम भी अभी लागू नहीं होगा।
RBI ने स्पष्ट किया है कि फेज-2, जो पहले 3 जनवरी 2026 से लागू होना था, उसकी नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी। तब तक मौजूदा व्यवस्था यानी फेज-1 सामान्य रूप से जारी रहेगी।
फेज-2 के स्थगित होने से चेक क्लीयरिंग से जुड़ी कड़ी टाइमलाइन पर भी फिलहाल रोक लग गई है। हालांकि RBI का मानना है कि यह कदम सिस्टम को और अधिक सुचारु तथा जोखिममुक्त बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
फेज-1 की मौजूदा व्यवस्था
CTS के तहत CCS फ्रेमवर्क का पहला फेज 4 अक्टूबर 2025 से लागू किया गया था। इसमें पारंपरिक बैच-आधारित चेक क्लीयरिंग सिस्टम को समाप्त कर दिनभर चलने वाली निरंतर प्रेजेंटेशन विंडो शुरू की गई। पहले चेक तय समय पर बैच में क्लियर होते थे, जबकि अब जैसे ही बैंक को चेक प्राप्त होता है, उसकी स्कैन की गई इमेज और MICR डेटा सीधे क्लियरिंग हाउस को भेज दिया जाता है।ड्रॉई बैंक इलेक्ट्रॉनिक तरीके से चेक की जांच करता है और स्वीकृति या अस्वीकृति का संदेश भेजता है। यदि निर्धारित कन्फर्मेशन विंडो के भीतर कोई जवाब नहीं मिलता, तो चेक को स्वतः स्वीकृत मानकर सेटलमेंट कर दिया जाता है।
फेज-1 के तहत चेक प्रेजेंटेशन का समय सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक है, जबकि बैंकों के लिए कन्फर्मेशन या रिजेक्शन भेजने की विंडो सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक खुली रहती है। इसी समय सीमा में क्लीयरिंग और सेटलमेंट की प्रक्रिया पूरी होती है।
फेज-2 में प्रस्तावित बड़ा बदलाव
फेज-2 में सबसे बड़ा बदलाव यह प्रस्तावित था कि ड्रॉई बैंक को चेक की इमेज मिलने के 3 घंटे के भीतर स्वीकृति या अस्वीकृति देना अनिवार्य होगा। यदि 3 घंटे के भीतर कोई जवाब नहीं आता, तो चेक को स्वतः स्वीकृत मान लिया जाएगा और सेटलमेंट हो जाएगा। इसका उद्देश्य ग्राहकों को तेजी से फंड उपलब्ध कराना था।
फिलहाल RBI के फैसले के बाद यह व्यवस्था लागू नहीं होगी और चेक क्लीयरिंग मौजूदा फेज-1 प्रणाली के तहत ही चलती रहेगी।




