
सूरत।व्यापारिक प्रतिस्पर्धा और बढ़ते डिजिटलीकरण के दौर में कई व्यापारी अपनी फर्म के जीएसटी नंबर का उपयोग कर महंगे मोबाइल फोन, लैपटॉप, कार, फ्रिज, एसी, कूलर, टीवी, फर्नीचर तथा अन्य सामान खरीद लेते हैं। कई मामलों में इन खरीदों पर चुकाए गए जीएसटी का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) भी क्लेम कर लिया जाता है। लेकिन कर विशेषज्ञों के अनुसार, यदि खरीदा गया सामान वास्तव में व्यापारिक गतिविधियों में उपयोग नहीं हो रहा है और उसका इस्तेमाल व्यक्तिगत, पारिवारिक या घरेलू जरूरतों के लिए किया जा रहा है, तो ऐसे सामान पर आईटीसी लेना व्यापारी के लिए भविष्य में भारी पड़ सकता है।
जीएसटी व्यवस्था का मूल सिद्धांत यह है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट केवल उन्हीं वस्तुओं और सेवाओं पर उपलब्ध है, जिनका उपयोग व्यवसाय की करयोग्य आपूर्ति या व्यापारिक कार्यों के लिए किया गया हो। यदि कोई व्यापारी अपनी फर्म के नाम और जीएसटी नंबर पर मोबाइल, कार, एसी, टीवी या अन्य सामान खरीदता है, लेकिन उनका उपयोग घर, परिवार या निजी सुविधा के लिए करता है, तो विभाग ऐसे आईटीसी को गलत दावा मान सकता है। खासकर तब, जब खरीद का स्वरूप, उपयोग का स्थान, बिलिंग पैटर्न और व्यवसाय की प्रकृति आपस में मेल नहीं खाते हों।
विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी विभाग अब डेटा विश्लेषण, रिटर्न मिलान, ई-इनवॉइस, ऑडिट और सर्वे जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से ऐसे मामलों पर अधिक नजर रख रहा है। विभागीय जांच, जीएसटी ऑडिट, स्क्रूटनी या किसी अन्य सत्यापन के दौरान यदि यह सामने आता है कि फर्म के जीएसटी नंबर पर खरीदा गया सामान वास्तव में निजी उपयोग में लिया गया है, तो व्यापारी को उस पर क्लेम किया गया पूरा आईटीसी वापस करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, नियमों के अनुसार उस राशि पर ब्याज, जुर्माना और अन्य कर देयताओं का बोझ भी उठाना पड़ सकता है। कई मामलों में यह राशि मूल टैक्स से भी अधिक परेशानी खड़ी कर देती है।
कर सलाहकारों के अनुसार, सबसे अधिक सावधानी उन वस्तुओं में बरतने की जरूरत है जिनका उपयोग व्यापार और निजी दोनों उद्देश्यों में संभव है। उदाहरण के लिए महंगे मोबाइल फोन, कार, एयर कंडीशनर, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, होम अप्लायंसेज, सजावटी सामान या ऐसी अन्य वस्तुएं, जिन्हें फर्म के नाम पर खरीद तो लिया जाता है, लेकिन उनका वास्तविक उपयोग कार्यालय की बजाय घर या व्यक्तिगत सुविधा के लिए किया जाता है। ऐसे मामलों में विभाग उपयोग के वास्तविक स्वरूप की जांच कर सकता है।
व्यापारियों के लिए यह समझना जरूरी है कि केवल फर्म के नाम से बिल होना या जीएसटी नंबर का उल्लेख होना ही आईटीसी के लिए पर्याप्त नहीं है। आईटीसी का दावा तभी सुरक्षित माना जाएगा, जब व्यापारी यह साबित कर सके कि खरीदा गया सामान वास्तव में व्यवसाय में इस्तेमाल हुआ है। इसके लिए संबंधित खरीद के बिल, भुगतान का रिकॉर्ड, उपयोग का स्थान, स्टॉक/एसेट रजिस्टर, कार्यालय में उपयोग के साक्ष्य, अकाउंटिंग एंट्री और अन्य सहायक दस्तावेज व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखना आवश्यक है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि कोई वस्तु पूरी तरह व्यापारिक उपयोग के लिए नहीं है, या उसके निजी उपयोग की संभावना अधिक है, तो उस पर आईटीसी क्लेम करने से पहले कर सलाहकार से राय अवश्य लेनी चाहिए। गलत आईटीसी क्लेम से अल्पकालिक लाभ भले दिखे, लेकिन भविष्य में नोटिस, टैक्स रिकवरी, ब्याज और पेनल्टी के रूप में इसकी कीमत कहीं अधिक चुकानी पड़ सकती है।
टैक्स कंसल्टेंट नारायण शर्मा का कहना है कि व्यापारी केवल व्यापारिक उपयोग से संबंधित वस्तुओं पर ही आईटीसी का दावा करें। निजी या घरेलू उपयोग के सामान को फर्म की खरीद दिखाकर उस पर आईटीसी लेने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए। सही कर अनुपालन, स्पष्ट दस्तावेजीकरण और वास्तविक व्यावसायिक उपयोग का रिकॉर्ड ही व्यापारी को भविष्य की कर संबंधी परेशानियों से सुरक्षित रख सकता है।




