पूर्णतया निरपेक्ष जीवन संभव नहीं : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण
खेल मंत्री श्री राज्यवर्धनसिंह राठौड़ ने किए शांतिदूत के दर्शन

-‘संग्र्ह वृत्ति बढ़े क्यों?’ विषय को शांतिदूत ने किया व्याख्यायित-साध्वी चन्दनबालाजी की स्मृति सभा का हुआ आयोजन
12.04.2026, रविवार, लाडनूं :योगक्षेम वर्ष निरंतर प्रवर्धमान है। जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में मानों धर्म, अध्यात्म व आस्था की त्रिवेणी प्रवाहित हो रही है। आचार्यश्री के श्रीमुख से नित्य ध्यान, मंगल प्रवचन के उपरान्त जिज्ञासा का समाधान प्राप्त कर चारित्रात्माएं ही नहीं, आम जनता व श्रद्धालु भी निहाल हो रहे हैं। यह सुअवसर मानों सभी को विशेष प्रेरणा प्रदान करने वाला बन रहा है।
रविवार को प्रातःकालीन मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम का शुभारम्भ युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ हुआ। साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत का संगान किया। महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने समुपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को ध्यान का प्रयोग कराया। तदुपरान्त शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित जन समुदाय को ‘संग्रह वृत्ति बढ़े क्यों?’ विषय पर पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि मनुष्य को जीवन जीना होता है तो सहयोग भी लेना होता है। अन्य प्राणियों से भी मनुष्य को सहयोग मिलता है। पूर्णतया निरपेक्ष होकर जीवन नहीं जीया जा सकता है। किसी न किसी का सहयोग लेना ही होता है। मनुष्यों का सहयोग लेना हो, अथवा पदार्थों का आदि का, सहयोग तो अपेक्षित ही होता है। सम्पूर्णतया निरपेक्ष होकर कोई नहीं जी सकता है। गति करना है तो धर्मास्तिकाय का सहयोग प्राप्त होता ही है। आकाशास्तिकाय स्थान प्रदान करता है। कितने-कितने पुद्गल काम में आते हैं। पुद्गलास्तिकाय का भी मानव को कितना सहयोग मिलता है।

जीव परस्पर एक दूसरे को सहयोग देते हैं। दुनिया में कितनी स्पष्ट बात है, जीव जीव का सहयोग करते हैं। किसी को पढ़ना है तो कोई पढ़ाने वाला होता है। कोई बीमार है तो उसे डॉक्टर का सहयोग मिलता है। छोटों से बड़ों को और बड़ों से छोटों को सहयोग मिल सकता है। कहा भी गया है कि ‘परस्परोपग्रहो जीवानाम्।’ मजदूर से मालिक को सहयोग मिल सकता है। इस प्रकार जीवों को एक-दूसरे का सहयोग मिलता है। आदमी को संग्रह की वृत्ति से बचने का प्रयास होना चाहिए। अनावश्यक चीजों का संग्रह करने से बचने का प्रयास करना चाहिए।
- मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में साध्वी चन्दनबालाजी की स्मृति सभा का आयोजन हुआ। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने उनका संक्षिप्त जीवन परिचय प्रदान करते हुए उनकी आत्मा के प्रति आध्यात्मिक मंगलकामना की। आचार्यश्री उनके प्रति मध्यस्थ भाव व्यक्त करते हुए चतुर्विध धर्मसंघ के साथ चार लोगस्स का ध्यान किया। इसके उपरान्त मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी, साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी, साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी ने उनकी आत्मा के प्रति आध्यात्मिक मंगलकामना की। साध्वीवृंद ने सामूहिक रूप में गीत का संगान किया। शासन गौरव साध्वी राजीमतीजी, साध्वी कनकश्रीजी, साध्वी कल्पलताजी, मुनि कमलकुमारजी, साध्वी जिनप्रभाजी, साध्वी विमलप्रज्ञाजी, साध्वी प्रमिलाकुमारीजी, साध्वी काव्यलताजी, साध्वी हिमश्रीजी, साध्वी सिद्धांतश्रीजी, साध्वी मैत्रीयशाजी, साध्वी धृतिप्रभाजी, मुनि श्रेयांशकुमारजी, साध्वी सरस्वतीजी ने उनकी आत्मा के प्रति मंगलकामना की। उनके संसारपक्षीय परिवार की ओर से श्री पुनीत जैन ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी।

आज युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में राजस्थान सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य और युवा मामले एवं खेलमंत्री श्री राज्यवर्धनसिंह राठौड़ पहुंचे। उन्होंने आचार्यश्री को वंदन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्यश्री का उनके साथ संक्षिप्त वार्तालाप का क्रम भी रहा।



