
सूरत। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बन रही तनावपूर्ण परिस्थितियों और कच्चे तेल के बढ़ते दामों का असर अब सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर साफ दिखाई देने लगा है। यार्न, केमिकल और पैकिंग मटेरियल के खर्च में लगातार बढ़ोतरी से कपड़ा उत्पादन महंगा हो गया है, लेकिन इसके मुकाबले बाजार से पर्याप्त भाव नहीं मिलने के कारण व्यापारियों की चिंता बढ़ती जा रही है।
जानकारी के अनुसार शिफॉन, रेनीयल, वेटलेस और 60 ग्राम प्लेन जैसी सामान्य क्वालिटी के ग्रे फैब्रिक में करीब 1 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है, जबकि फैंसी, डोला, लिनन, जकार्ड, ओवर फैंसी और मार्शमेलो जैसी बेहतर क्वालिटी में 2 से 3 रुपये तक लागत बढ़ी है। इसके साथ ही प्रोसेसिंग मिलों में जॉबवर्क के दर बढ़ने से तैयार कपड़े की कुल लागत में और अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
लागत बढ़ने के चलते व्यापारियों ने साड़ियों के भाव में क्वालिटी के अनुसार 10 से 15 रुपये तक बढ़ोतरी का प्रयास किया, लेकिन बाहरी मंडियों से केवल 5 रुपये तक ही भाव बढ़ोतरी मिल पा रही है। इससे व्यापारियों के लिए मुनाफा बनाए रखना कठिन हो गया है और कई व्यापारियों की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है।
मार्च एंडिंग और अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण बाजार में मांग भी कमजोर बनी हुई है। इसके चलते कई व्यापारी मिलों में तैयार माल के नए प्रोग्राम फिलहाल रोक रहे हैं। वहीं नकदी की आवश्यकता वाले व्यापारी खर्च निकालने के लिए कम कीमत पर माल बेचने को मजबूर हो रहे हैं।
उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि कच्चे माल की लागत इसी तरह बढ़ती रही और बाजार से उचित भाव नहीं मिला तो आने वाले समय में सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर व्यापक असर पड़ सकता है। इससे उत्पादन, व्यापार और रोजगार तीनों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।




