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युद्ध के असर से गुजरात के बंदरगाहों पर मंदी, हजारों श्रमिकों की रोजी-रोटी पर संकट

कांडला और मुंद्रा पोर्ट पर 2000 से अधिक कंटेनर फंसे, होली के बाद कई मजदूर काम न मिलने की आशंका से वापस नहीं लौटे

कांडला।मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब गुजरात के बंदरगाहों पर भी दिखाई देने लगा है। राज्य के दो प्रमुख बंदरगाह कांडला और मुंद्रा पर दो हजार से अधिक कंटेनर फंसे पड़े हैं। वहीं गुजरात के पांच मुख्य सहित कुल 49 बंदरगाहों पर काम करने वाले हजारों श्रमिक होली के बाद वापस नहीं लौटे हैं। अनुमान है कि लगभग एक लाख से अधिक श्रमिकों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है और काम की कमी के कारण उनके अपने वतन लौटने की आशंका जताई जा रही है।
युद्ध के कारण आयात-निर्यात पर बड़ा असर पड़ा है। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की स्थिति के चलते अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन प्रभावित हुआ है। कच्छ के कांडला और मुंद्रा बंदरगाहों पर 2000 से अधिक कंटेनर और कई जहाज अटके हुए हैं। जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध और शिपिंग कंपनियों द्वारा बीमा राशि बढ़ाए जाने से यह स्थिति पैदा हुई है।
फिलहाल निर्यात के कई कंटेनरों में चावल, एलपीजी तथा बल्क कार्गो जैसे सल्फर और जिप्सम की ढुलाई भी प्रभावित हो गई है। इन दोनों बंदरगाहों से बड़े पैमाने पर आयात-निर्यात होता है, लेकिन टर्मिनलों पर हजारों कंटेनर अटकने से शिपिंग कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। मिडिल ईस्ट के देशों के लिए भेजे जाने वाले कंटेनर जहाजों में लोड नहीं हो पा रहे हैं। जहाजों की रवानगी में देरी, ऑपरेशन में बाधा और गेट गतिविधियों में अनिश्चितता के कारण लॉजिस्टिक सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।
भारत से अनाज, केमिकल, इंजीनियरिंग सामान के साथ-साथ ताजे फल और सब्जियां भी मिडिल ईस्ट और यूरोप के देशों में निर्यात किए जाते हैं। जनवरी से अप्रैल के बीच यूरोप में फल-सब्जियों का उत्पादन कम होने से भारत से निर्यात अधिक होता है, लेकिन मौजूदा हालात के कारण इस व्यापार पर भी असर पड़ा है।
सूत्रों के अनुसार गुजरात में कुल 49 बंदरगाह हैं, जिनमें कांडला, मुंद्रा, पिपावाव, दहेज और हजीरा प्रमुख हैं। इन बंदरगाहों पर आयात-निर्यात का काम बड़े पैमाने पर होता है और यहां बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक काम करते हैं।
हाल ही में होली और धुलेटी के त्योहार के दौरान कई श्रमिक अपने गांव लौट गए थे। इनमें से कई अब तक वापस नहीं आए हैं। युद्ध के कारण काम मिलने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है, इसलिए उनके लौटने की संभावना कम दिखाई दे रही है।
बताया जा रहा है कि प्रारंभिक स्तर पर ही गुजरात के बंदरगाहों पर आयात-निर्यात गतिविधियों में लगभग 40 प्रतिशत तक गिरावट आ चुकी है। यदि यही स्थिति बनी रही तो कच्छ सहित पूरे गुजरात के बंदरगाहों पर काम करने वाले श्रमिकों और उनसे जुड़े कारोबारियों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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