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सूरत: निलेश कुंभाणी के नामांकन रद्द मामले में FIR दर्ज करने की मांग, फोरेंसिक जांच की उठी मांग

सूरत, 16 मार्च। कांग्रेस के लोकसभा उम्मीदवार निलेश कुंभाणी का नामांकन रद्द होने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस पूरे प्रकरण को लेकर जागरूक नागरिक एवं समाजसेवी संजय इझावा ने सूरत शहर पुलिस कमिश्नर, जिला कलेक्टर (जिला चुनाव अधिकारी) और राज्य चुनाव आयोग को लिखित आवेदन देकर विस्तृत जांच तथा FIR दर्ज करने की मांग की है।
आवेदन में बताया गया है कि 24-सूरत लोकसभा क्षेत्र के लिए इंडियन नेशनल कांग्रेस ने निलेशभाई मनसुखभाई कुंभाणी को उम्मीदवार घोषित किया था। उन्होंने 18 अप्रैल 2024 को जिला चुनाव अधिकारी के समक्ष नामांकन फॉर्म और शपथपत्र के साथ तीन सेट में उम्मीदवार पत्र प्रस्तुत किए थे। इन नामांकन पत्रों में ध्रुविन धीरुभाई धामेलिया, जगदीश नानजीभाई सावल्या और पोलरा रमेशभाई बबचंदभाई के प्रपोजर के रूप में हस्ताक्षर दर्शाए गए थे।
लेकिन 20 अप्रैल 2024 को इन तीनों व्यक्तियों ने शपथपत्र देकर स्पष्ट किया कि उन्होंने न तो किसी प्रकार का समर्थन दिया और न ही प्रपोजर के रूप में कोई हस्ताक्षर किए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित नहीं थे। इन बयानों के आधार पर 21 अप्रैल 2024 को जिला चुनाव अधिकारी द्वारा निलेश कुंभाणी का नामांकन रद्द कर दिया गया।
इसके बाद चुनाव प्रक्रिया में अन्य उम्मीदवारों द्वारा नाम वापस लेने या नामांकन रद्द होने की स्थिति में मुकेशकुमार चंद्रकांत दलाल निर्विरोध निर्वाचित घोषित हुए।
संजय इझावा ने अपनी शिकायत में कहा है कि इस पूरे घटनाक्रम के चलते लगभग 17,67,377 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सके, जो लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ एक गंभीर स्थिति है।
आवेदन में पुलिस से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जांच की मांग की गई है, जिनमें—नामांकन पत्र में दर्शाए गए तीनों प्रपोजरों के हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच,नोटरी के समक्ष किए गए हस्ताक्षरों की सत्यता की पुष्टि,18 अप्रैल और 20 अप्रैल को दिए गए हस्ताक्षरों में से कौन से वास्तविक हैं, इसकी वैज्ञानिक जांच
नामांकन दाखिल करते समय प्रपोजरों की पहचान का सत्यापन किया गया था या नहीं, इसकी जांच
इसके अलावा,आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि जांच में फर्जी हस्ताक्षर, जाली दस्तावेज या झूठा शपथपत्र देने की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
संजय इझावा ने पूरे मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए सभी जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की अपील की है। उन्होंने यह भी बताया कि इस आवेदन की प्रतियां जिला कलेक्टर, रिटर्निंग ऑफिसर सूरत और भारत के चुनाव आयोग को भी भेजी गई हैं।

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