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ईरान-इजरायल युद्ध का असर सूरत के टेक्सटाइल उद्योग पर, गैस की कमी से वीविंग यूनिटों में उत्पादन आधा

कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित, 35 हजार वीविंग यूनिटों की भट्ठियां बंद होने से कपड़ा उत्पादन 50% रह गया

सूरत। ईरान-इजरायल युद्ध का असर अब सूरत के वीविंग उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई बाधित होने से गैस आधारित करीब 35 हजार वीविंग यूनिटों में उत्पादन आधा रह गया है। पिछले दो दिनों से गैस सिलेंडरों की पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिलने के कारण कई यूनिटों की भट्ठियां बंद हो गई हैं, जिससे उद्योग की स्थिति चिंताजनक बनती जा रही है।
सूरत में लगभग 50 हजार से अधिक वीविंग यूनिट कार्यरत हैं। इनमें से करीब 35 हजार यूनिटों में यार्न और जरी को गर्म करने के लिए कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों का उपयोग किया जाता है। वीविंग प्रक्रिया में यार्न को सही ट्विस्ट देने के लिए उसे गर्म करना जरूरी होता है। विशेष रूप से 12 टीपीएम (ट्विस्ट पर मीटर) यार्न की प्रोसेसिंग में गैस सिलेंडर का उपयोग अधिक होता है।
उद्योगकारों के अनुसार कपड़ा तैयार होने के बाद उसकी ब्लीचिंग प्रक्रिया में भी कॉमर्शियल गैस की आवश्यकता होती है। सामान्य तौर पर एक गैस सिलेंडर से पांच से छह भट्ठियां आसानी से चल सकती हैं, लेकिन पिछले दो दिनों से गैस सिलेंडरों की पर्याप्त सप्लाई नहीं मिलने के कारण कई वीविंग यूनिटों में भट्ठियां बंद करनी पड़ी हैं। इसके चलते वीविंग यूनिटों की उत्पादन क्षमता में भारी गिरावट आई है और उद्योगकारों की आर्थिक चिंता बढ़ने लगी है।
लंबे समय तक संकट रहा तो किस्त भरना होगा मुश्किल
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि वीविंग यूनिटें एमएसएमई श्रेणी में आती हैं और इनमें से लगभग 90 प्रतिशत यूनिटें फाइनेंस पर आधारित हैं। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो उद्योगकारों के लिए बैंक और फाइनेंस कंपनियों की किस्तें भरना मुश्किल हो सकता है। फिलहाल कई यूनिटों में उत्पादन लगभग 50 प्रतिशत ही रह गया है। आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है, जिससे उत्पादन और रोजगार दोनों पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।

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