अहमदाबाद सिटी सिविल कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश: जैन टेक्सटाइल मामले में माल बिक्री पर रोक, कोर्ट रिसीवर नियुक्ति के निर्देश

अहमदाबाद की महेरबान सिटी सिविल कोर्ट, कोर्ट नंबर 15 (ऑक्ज़ीलरी चेंबर कोर्ट) ने नादारी पिटीशन नंबर 2/2025 में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आदेश पारित किया है। इस मामले में जैन टेक्सटाइल के भागीदार रितेश तेजकरण वैध और रविकांत तेजकरण वैध ने अलग-अलग 133 पेडियों के विरुद्ध नादारी की याचिका दाखिल की थी। यह याचिका 5 मई 2025 को अदालत में प्रस्तुत की गई थी।
मामले में आरोप था कि 133 पेडियों में से कुछ ने आपस में मिलीभगत कर कपड़े के लेन-देन का षड्यंत्र रचा और माल को इधर-उधर कर दिया। इस माल की अनुमानित कीमत लगभग 6.72 करोड़ रुपये बताई गई। पूरे मामले की जानकारी अहमदाबाद मस्कती महाजन की ओर से अधिवक्ता के.ए. शाह ने 12 फरवरी 2026 को अदालत में ठोस साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत की और कपड़े के आगे किसी भी प्रकार के विक्रय या हस्तांतरण पर रोक लगाने की मांग की।
16 फरवरी 2026 को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। अदालत ने सभी कथित मिलीभगत करने वालों को मामले से अलग करते हुए अब तक बेचे गए कपड़े से संबंधित सभी बिल अदालत में प्रस्तुत करने का आदेश दिया। साथ ही, शेष कपड़े को कोर्ट रिसीवर की कस्टडी में लेने का निर्देश भी दिया गया।
अदालत ने आगे निर्देश दिया कि अहमदाबाद मस्कती महाजन के अध्यक्ष और सचिव की ओर से दो व्यक्तियों के नाम कोर्ट रिसीवर के रूप में नियुक्ति हेतु प्रस्तुत किए जाएं। इसके अतिरिक्त अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया कि जैन टेक्सटाइल को किसी भी प्रकार का कपड़ा बेचा या सप्लाई नहीं किया जाए।
अदालत के इस आदेश को व्यापारिक जगत में महत्वपूर्ण और नजीर के रूप में देखा जा रहा है, जिससे लेन-देन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होने की उम्मीद जताई जा रही है।




