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राज्य के पुलिस महानिदेशक विकास सहाय सेवानिवृत्त, सीनियर-मोस्ट IPS डॉ. के.एल.एन. राव को सौंपी गई जिम्मेदारी

अटकलों पर विराम : गुजरात को मिला इंचार्ज DGP, डॉ. राव संभालेंगे कार्यभार

गांधीनगर।गुजरात के पुलिस महानिदेशक (DGP) विकास सहाय के 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने के साथ ही राज्य में नए पुलिस प्रमुख को लेकर चल रही अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। राज्य सरकार ने सीनियर-मोस्ट IPS अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मी नारायण राव को इंचार्ज DGP नियुक्त किया है। फिलहाल राज्य को स्थायी DGP नहीं मिला है, बल्कि अंतरिम व्यवस्था के तहत यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उल्लेखनीय है कि विकास सहाय आधिकारिक रूप से छह माह पूर्व ही सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन सरकार ने उन्हें 31 दिसंबर 2025 तक का विस्तार दिया था, जो अब समाप्त हो गया है। उनके सेवानिवृत्त होते ही अंतिम घंटों में सरकार ने इंचार्ज DGP की नियुक्ति का निर्णय लिया।
डॉ. के.एल.एन. राव 1992 बैच के IPS अधिकारी हैं और अक्टूबर 2027 में सेवानिवृत्त होंगे। उनके पास अभी लगभग दो वर्षों का सेवा कार्यकाल शेष है, इसके बावजूद उन्हें स्थायी DGP नियुक्त न किए जाने से पुलिस महकमे में चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि क्या आगे चलकर उन्हें स्थायी रूप से यह पद सौंपा जाएगा या नहीं।
डॉ. राव का प्रशासनिक और मैदानी अनुभव काफी व्यापक रहा है। वे हिम्मतनगर, खेड़ा और मेहसाणा जैसे जिलों में जिला पुलिस अधीक्षक रह चुके हैं। इसके अलावा वे राजकोट रेंज में DIG, अहमदाबाद में जॉइंट पुलिस कमिश्नर तथा लंबे समय तक गुजरात की जेलों के प्रमुख के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में वे CID क्राइम और रेलवे में DGP के रूप में कार्यरत थे।
नए DGP की दौड़ में अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर जी.एस. मलिक का नाम भी चर्चा में था, लेकिन सरकार की ओर से स्थायी नियुक्ति को लेकर अभी कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया है।
डॉ. राव को एक कड़े, निष्पक्ष और विवाद-रहित अधिकारी के रूप में जाना जाता है। किसी भी “खास गुट” से न जुड़े होने के कारण उनकी निष्पक्ष छवि मानी जाती है। अपराध जांच, रेलवे पुलिस और जेल प्रशासन में उनका अनुभव उन्हें वर्तमान परिस्थितियों में अहम बनाता है।
इंचार्ज DGP के रूप में डॉ. राव अब गुजरात पुलिस का नेतृत्व करेंगे। उनके कार्यकाल में अपराध नियंत्रण, आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।
वहीं, विकास सहाय के सेवानिवृत्त होने के साथ ही भारतीय पुलिस सेवा में उनके लगभग चार दशक लंबे करियर का औपचारिक समापन हो गया है।

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