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झूठ, कपट व चोरी को छोड़ने से आत्मा बन सकती है निर्मल : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण

किशनगढ़ में केन्द्रीय मंत्री सहित अनेक गणमान्यों ने आचार्यश्री का किया स्वागत

मार्बल नगरी किशनगढ़ में महातपस्वी महाश्रमण का मंगल पदार्पण -स्वागत में उमड़ा जन सैलाब, प्रत्येक जाति-संप्रदाय के लोग हुए शामिल

—साध्वीप्रमुखाजी ने भी किशनगढ़वासियों को किया उद्बोधि-किशनगढ़वासियों ने आचार्यश्री के दी भावनाओं को अभिव्यक्ति

09.01.2026, शुक्रवार, किशनगढ़, अजमेर (राजस्थान) :जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, अखण्ड परिव्राजक, महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ वर्तमान में अजमेर जिले को पावन बना रहे हैं। सर्दी के मौसम में भी आचार्यश्री की जनकल्याणकारी यात्रा अबाध रूप से गतिमान है। घना कोहरा हो या शीतलहर हो अथवा सूर्य के नहीं निकलने बढ़ी हुई गलन हो, इन सभी प्राकृतिक विषमताओं से अप्रभावित युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी निरंतर गतिमान हैं।

शुक्रवार को प्रातःकाल की मंगल बेला में शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने गगवाना से मंगल प्रस्थान किया। आचार्यश्री आज मार्बल नगरी नाम से विख्यात किशनगढ़ की ओर गतिमान थे। किशनगढ़ जहां से सबसे ज्यादा मात्रा में मार्बल की खुदाई होती है। इसके साथ-साथ मार्बल को साफ-सफाई करने के उपरान्त मार्बल के कचरे को एक जगह एकत्रित होने वाले स्थान अर्थात डम्पिंग यार्ड अब मानों पर्यटक स्थल का रूप ले चुका है। सफेद मार्बल के कचरे की चमक और उसके मध्य जगह-जगह एकत्रित पानी दर्शकों को मानों किसी बफीर्ली वादी से कर्म प्रतीत नहीं होते।

किशनगढ़वासी अपने आराध्य की अभिवंदना के लिए आतुर नजर आ रहे थे। पूरी नगरी मानों आध्यात्मिक आलोक से जगमगा रही थी। स्थान-स्थान पर खड़े हर वर्ग, संप्रदाय के लोग मानवता के मसीहा का दर्शन करने को लालायित नजर आ रहे थे। आचार्यश्री जैसे ही किशनगढ़ की नगरी में प्रविष्ट हुए तो श्रद्धालुओं के बुलंद जयघोष से हार्दिक स्वागत किया। भव्य स्वागत जुलूस में मानों समस्त जाति, धर्म और संप्रदाय के लोग सहर्ष सम्मिलित नजर आ रहे थे। आरके मार्बल ग्रुप के चेयरमैन श्री अशोक पाटनी ने भी आचार्यश्री के स्वागत में उपस्थित थे। वे आचार्यश्री के साथ जुलूस में साथ रहे। आचार्यश्री भव्य स्वागत जुलूस के साथ किशनगढ़ में स्थित आरके कम्युनिटि सेंटर में पधारे।

‘जय समवसरण’ में आयोजित मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम में परम पावन आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित जनता को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि इस सृष्टि में नित्यतता और अनित्यतता दोनों ही स्थितियां होती हैं। दुनिया में कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जो स्थाई भी होती है। उनमें एक है-आत्मा। आत्मा नित्य है। आत्मा को कोई मार नहीं सकता, काट नहीं सकता, कोई उसे छेद नहीं कर सकता, उसे जलाया भी नहीं जा सकता है। वहीं जीवन को देख लें और इस शरीर को ही देखा जाए तो यह अनित्य है। जन्म-मृत्यु का चक्र चलता रहता है। आत्मा बार-बार जन्म लेती है और मृत्यु को प्राप्त होती है। प्रश्न हो सकता है कि आदमी को जीवन को क्यों जीना चाहिए। शास्त्र में उत्तर प्रदान किया गया कि आत्मा को विशुद्ध बनाने के लिए जीवन जीना चाहिए। चेतना को निर्मल बनाकर अपनी आत्मा को मोक्ष तक पहुंचा देना बहुत बड़ा कार्य होता है। धर्म की साधना का सबसे बड़ा लक्ष्य यही होता है कि अपनी आत्मा को पूर्वकृत कर्मों से मुक्त बना लेना और मोक्षश्री का वरण कर लेना। तप, त्याग, ध्यान, स्वाध्याय, सेवा, साधना-ये सारे उपायों के मूल में आत्मा को कर्म से मुक्त बनाना होता है।

मनुष्य का जीवन भी एक दिन समाप्त हो सकता है। इसलिए आदमी को अपने जीवन को अच्छा बनाने का प्रयास करना चाहिए। आदमी यह प्रयास करे कि वह कोई भी कार्य करे, ईमानदारी से करने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में ईमानदारी होती है तो आत्मा निर्मल बन सकती है। झूठ, कपट और चोरी आदमी छोड़ दे तो आत्मा निर्मल बन सकती है। किशनगढ़ की जनता में ईमानदारी, अहिंसा, नैतिकता व नशामुक्ति की चेतना बनी रहे।

आचार्यश्री की मंगल प्रेरणा के उपरान्त साध्वीप्रमुखाजी ने किशनगढ़वासियों को अभिप्रेरित किया। स्थानीय तेरापंथी सभा के अध्यक्ष श्री पन्नालाल छाजेड़, तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष श्री रौनक घोड़ावत ने आचार्यश्री के स्वागत में अपनी भावाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ महिला मण्डल ने स्वागत गीत का संगान किया। ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी।

कृषि और किसान कल्याण राज्यमंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति देते हुए मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। पूर्व विधायक श्री सुरेश टांक ने आचार्यश्री के स्वागत में अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी।

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