‘जाग जाग ओ मानव!’ विषय पर ‘सत्संग सप्ताह’ का आयोजन

सूरत। सेठश्री फुलचंद कल्याणचंद झवेरी ट्रस्ट के आराधना भवन में, अठवालाइंस जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ के तत्वावधान में, जैनाचार्य पूज्य पद्मदर्शनसूरिजी महाराज की पावन निश्रा में ‘जाग जाग ओ मानव!’ विषय पर ‘सत्संग सप्ताह’ का आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रोताओं की उपस्थिति रही और वातावरण भक्ति व वैराग्य से ओत-प्रोत रहा।
इस पावन अवसर पर आचार्यश्री ने अमृतवाणी का प्रवाह करते हुए कहा कि “जीवन में आपके रोल अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन गोल एक ही होना चाहिए।” उन्होंने फुटबॉल का उदाहरण देते हुए समझाया कि दोनों टीमें गेंद को अलग-अलग दिशा में मारती हैं, पर लक्ष्य गोल ही होता है। इसी प्रकार मनुष्य-भव प्राप्त होने के बाद जीवन का एकमात्र लक्ष्य मोक्ष होना चाहिए। मोक्ष का अर्थ है—बंधन से मुक्ति। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऊपर के मोक्ष को पाने के लिए पहले भीतर का मोक्ष आवश्यक है।
आचार्यश्री ने कहा कि केवल मोक्ष की बातें करने या मोक्ष-माला जपने से मोक्ष नहीं मिलता; इसके लिए कठोर पुरुषार्थ आवश्यक है। जो व्यक्ति भीतर के राग-द्वेष और विषय-कषाय की अग्नि में जल रहा हो और फिर भी मोक्ष की बातें करे, वह उचित नहीं है। जिसे यह संसार बंधनरूप नहीं लगता, उसकी मुक्ति कठिन है।
उन्होंने आत्मलक्षी साधना पर बल देते हुए कहा कि आज की अधिकांश साधनाएँ देह-केंद्रित हो गई हैं। जिस शरीर की हम अत्यधिक देखभाल करते हैं, वही एक दिन श्मशान में भस्म होने वाला है। हमारा चिंतन निरंतर शरीर के आसपास घूमता रहता है, जबकि साथ आने वाली आत्मा की चिंता कम ही की जाती है। आत्मचिंतन से ही भाग्य बदलता है—यह संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान बनने के लिए आत्मसंप्रेक्षण और आत्मदृष्टि आवश्यक है।
आचार्यश्री ने कहा कि जीवन में कैसी भी आंधियाँ आएँ, यदि परमात्मा आपके साथ हैं तो कोई भी आपका बाल भी बाँका नहीं कर सकता। तेजी-मंदी के तूफानों के बीच मन को मस्त और प्रसन्न रखने का कार्य परमात्मा करते हैं। सत्संग सप्ताह के दौरान श्रोताओं ने गहन शांति और आध्यात्मिक प्रेरणा का अनुभव किया।




