इन्द्रध्वज विधान श्रद्धा एवं उल्लास के साथ सानंद सम्पन्न

सूरत।दिगम्बर जैन महासमिति के तत्वावधान में पार्ले पॉइंट क्षेत्र में 21 जनवरी से 25 जनवरी तक आयोजित पाँच दिवसीय इन्द्रध्वज विधान आज अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में सानंद सम्पन्न हुआ। इस पावन आयोजन में विधानाचार्य विनोद भैयाजी एवं विधानाचार्य रुपेश भैयाजी का सान्निध्य प्राप्त हुआ, जिससे सम्पूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।
इस भव्य धार्मिक विधान की सफलता में सकल जैन समाज का सराहनीय सहयोग एवं सक्रिय सहभागिता रही। समाजजनों के सामूहिक प्रयास, अनुशासन एवं समर्पण से यह आयोजन अत्यंत गरिमामय रूप में सम्पन्न हुआ। विशेष रूप से लता घीवाला के सहयोग एवं समर्पण की समाज द्वारा प्रशंसा की गई।
आयोजन के दौरान अध्यक्ष मंजू गोधा, सचिव संगीता जैन, कोषाध्यक्ष सिम्पल गादिया सहित सम्पूर्ण कार्यकारिणी एवं समाज के वरिष्ठजन एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी विधि-विधानों का शास्त्रसम्मत एवं अनुशासित ढंग से निर्वहन किया गया।

इन्द्रध्वज विधान का आध्यात्मिक महत्व बताते हुए आयोजकों ने कहा कि मध्यलोक में स्थित 458 अकृत्रिम चैत्यालयों की प्रत्यक्ष वंदना करना संभव नहीं होने के कारण इस विधान के माध्यम से श्रद्धालु भावपूर्वक स्वयं को इन्द्र एवं इन्द्राणी के रूप में मानकर, यहीं से उन अकृत्रिम जिनालयों की पूजा-वंदना करते हैं। यह विधान गहन भक्ति, श्रद्धा एवं आत्मिक शुद्धि का अनुपम साधन माना जाता है।
पूरे पाँच दिनों तक श्रद्धालुओं ने अत्यंत भक्ति भाव से विधान किया, जिससे वातावरण धर्ममय एवं शांतिमय बना रहा। आयोजन के समापन अवसर पर दिगम्बर जैन महासमिति द्वारा सभी सहयोगकर्ताओं, सहभागियों एवं समाजजनों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया।




