सामाजिक/ धार्मिकसूरत सिटी

-दया के दो रूप-लौकिक व लोकोत्तर : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण

दायित्वों का हुआ हस्तांतरण, आचार्यश्री ने सुनाया मंगलपाठ

आचार्य भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष के तीसरे चरण के कार्यक्रम का मंगल शुभारम्भ

-महातपस्वी महाश्रमण के छोटी खाटू प्रवास का अंतिम दिन

-मंगलभावना समारोह में छोटी खाटू के समस्त समाज ने दी भावनाओं को अभिव्यक्ति

-29.01.2026, गुरुवार, छोटी खाटू, डीडवाना-कुचामण (राजस्थान) :छोटी खाटू में मर्यादा महोत्सव सहित दसदिवसीय प्रवास का अंतिम दिन। जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के इन दसदिवसीय प्रवास में छोटी खाटू में धर्म-अध्यात्म की ऐसी गंगा प्रवाहित हुई है, जो दशकों तक छोटी खाटूवासियों को उत्प्रेरित करती रहेगी। मर्यादा महोत्सव के बाद भी प्रतिदिन आयोजित होने वाले कार्यक्रमों श्रद्धालुओं की उपस्थिति, केन्द्रीय व राज्य स्तरीय अनेक मंत्रियों, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत सहित अनेक गणमान्यों का आगमन भी इस प्रवास को संघ प्रभावक बनाने वाला रहा।

गुरुवार को छोटी खाटू के अंतिम दिन आचार्यश्री भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष के तीसरे चरण का शुभारम्भ महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में आयोजित हुआ। आज का विषय रहा-चोर का दृष्टांत, अध्यात्म का वृत्तांत। युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने समुपस्थित जनमेदिनी को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि शास्त्र में कहा गया है कि पहले ज्ञान और फिर अच्छा आचरण। सम्यक् ज्ञान के अनुसार आचरण होता है तो वह आचरण भी अच्छा हो सकता है। दया शब्द बहुत प्रसिद्ध है। वर्तमान में हमारे आद्य अनुशास्ता भिक्षु स्वामी का जन्म त्रिशताब्दी वर्ष भी चल रहा है। आज से इस वर्ष के तृतीय चरण के त्रिदिवसीय कार्यक्रम का शुभारम्भ हो रहा है। भिक्षु स्वामी का साहित्य भी सिद्धांत के रूप में मिलता है। दया को अनेक रूपों में देखा जा सकता है। अनेक रूपों में सेवा और दया के कार्य को देखा जा सकता है। संत लोग भी दया कर लोगों का उपकार किया करते हैं।

आचार्यश्री भिक्षु ने दया को दो रूपों में विभक्त किया- लौकिक दया और लोकोत्तर दया। जीव अपने आयुष्य बल से जीते हैं, उसमें अपनी कोई दया नहीं और और प्रतिदिन कितने प्राणी अपने आयुष्य से मरते भी हैं, उसमें अपने को कोई पाप नहीं लगता है। जो व्यक्ति यदि हिंसा करता है तो वह ही हिंसा के फल का भागीदार होता है। छहकाय के जीवों की हिंसा का त्याग करना दया होती है। कई बार समझाने से चोर भी चोरी का परित्याग कर सकता है। अणुव्रत का भी यही कार्य है। आचार्यश्री ने संतों द्वारा चोरी का परित्याग कराने की घटना को दृष्टांत रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि संतों द्वारा चोरों को चोरी का त्याग कराया तो दो काम हो गए। एक तो सेठ का पैसा बच गया तो भौतिक कार्य हुआ और उससे चोरों की आत्मा का सुधार हो गया वह आध्यात्मिक कार्य हो गया। संतों ने जो चोरों की आत्मा के कल्याण का कार्य किया, वह लोकोत्तर दया का कार्य हो गया। इससे संतों को भी आध्यात्मिक लाभ हो गया। इस दृष्टांत से यह समझा जाए कि कई बार मूल कार्य से अनेक कार्य भी सिद्ध हो सकते हैं। आचार्यश्री ने कहा कि छोटी खाटू में खूब धर्म की भावना बनी रहें।

मुनि मेघकुमारजी ने अपनी पैतृक भूमि पर आचार्यश्री का अभिनंदन किया। श्रीमती शशि सेठिया ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ महिला मण्डल-छोटी खाटू ने आचार्यश्री भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष के संदर्भ में गीत को प्रस्तुति दी।छोटी खाटू विद्यालय के प्रिंसिपल श्री सुखवीर डूडी, माली समाज की ओर से श्री भंवरलाल टांक, जाट समाज की ओर से श्री रामेश्वर खींचड़, माहेश्वरी समाज की ओर से श्री कालूरामजी सारडा श्री अमित सारडा, पारिख समाज की ओर से श्री नवरतनमल पारिख, नवल समाज की ओर से श्री लोकेश नवल, विश्व हिन्दू परिषद की ओर से श्री प्रकाश सारडा, पूर्व सरपंच श्री कल्याणसिंह राठौड़, डॉ. दिलीप चौधरी, आरएसएस की ओर से श्री दिनेश चौधरी, मुस्लिम समाज की ओर से श्री सरवर कुरैशी, सैन समाज की ओर से श्री बजरंग सैन, स्थानीय तेरापंथी सभाध्यक्ष श्री डालमचंद धारीवाल, आचार्यश्री महाश्रमण मर्यादा महोत्सव व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री मनसुखलाल सेठिया ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने उपस्थित जनता को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।

आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में आचार्यश्री की यात्रा व्यवस्था से संदर्भित दायित्व हस्तांतरण का भी उपक्रम रहा। इस संदर्भ में आचार्यश्री महाश्रमण मर्यादा महोत्सव व्यवस्था समिति-छोटी खाटू के महामंत्री श्री प्रकाश बेताला ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी तथा योगक्षेम वर्ष व्यवस्था समिति-लाडनूं की ओर से गीत की प्रस्तुति दी गई। तदुपरान्त आचार्यश्री महाश्रमण मर्यादा महोत्सव व्यवस्था समिति- छोटी खाटू के पदाधिकारियों ने आचार्यश्री महाश्रमण योगक्षेम वर्ष व्यवस्था समिति के पदाधिकारियों को जैन ध्वज प्रदान कर व्यवस्था के दायित्व का हस्तांतरण हुआ। इस संदर्भ में दोनों ओर की व्यवस्था समितियों को मंगल आशीर्वाद के साथ मंगलपाठ सुनाया।

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