धर्म की रक्षा करेंगे तो धर्म आपकी रक्षा करेगा — जैनाचार्य पद्मदर्शनसूरिजी महाराज

सूरत। वेसु स्थित शिवकार्तिक अपार्टमेंट के गृहन जिनालय में आयोजित शांति धारा अभिषेक के अवसर पर जैनाचार्य पू. पद्मदर्शनसूरिजी महाराज ने प्रभावशाली प्रवचन देते हुए कहा कि यदि आप धर्म की रक्षा करेंगे, तो धर्म स्वयं आपकी रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी यदि व्यक्ति अनन्य श्रद्धा के साथ धर्म का आश्रय लेता है, तो वह सभी संकटों से मुक्त हो सकता है।
जैनाचार्य ने आज के भौतिकवादी युग पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जैसे आज हर वस्तु “ब्रांडेड” चाहिए, वैसे ही जीवन को भी गुणों से “ब्रांडेड” बनाना चाहिए। जीवन में दोषों का दहन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि धन प्राप्ति के लिए जितने प्रयास किए जाते हैं, यदि उतने ही प्रयास गुण प्राप्ति के लिए किए जाएँ तो जीवन नंदनवन बन सकता है।
उन्होंने दृष्टि परिवर्तन पर विशेष बल देते हुए कहा कि जैसी दृष्टि होगी, वैसी ही सृष्टि दिखाई देगी। सज्जन व्यक्ति हर परिस्थिति में अच्छाई खोज लेता है, जबकि दुर्जन को हर जगह बुराई ही नजर आती है। हंस, कोयल और कौए के उदाहरणों से उन्होंने गुणदृष्टि और दोषदृष्टि का अंतर समझाया।
पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए जैनाचार्य ने कहा कि अंधानुकरण ने भारतीय भाषा, पहनावे, नम्रता और संस्कारों को नुकसान पहुँचाया है। यदि समय रहते दिशा नहीं बदली गई, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। उन्होंने संदेश दिया कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन और धर्मनिष्ठ दृष्टि अत्यंत आवश्यक है।



