धर्मराजस्थानसामाजिक/ धार्मिक

छोटी खाटू की धरा पर तेरापंथ धर्मसंघ के महाकुम्भ 162वें मर्यादा महोत्सव का भव्य शुभारम्भ

पूज्य सन्निधि में पहुंचे केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्रसिंह शेखावत

-‘मर्यादा पत्र’ को तेरापंथाधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने किया स्थापित

-सभी में बनी रहे सेवा की पुनीत भावना : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण

-शुभ अवसर पर आपका दर्शन प्राप्त होना सौभाग्य की बात : श्री गजेन्द्रसिंह शेखावत

-साध्वीवर्याजी ने भी चतुर्विध धर्मसंघ को किया संबोधित

-साधु-साध्वी समाज ने आचार्यश्री से सेवा में नियोजित करने की प्रार्थना

-युगप्रधान अनुशास्ता ने सेवाकेन्द्रों पर सेवादायी साध्वियों को किया नियुक्त

-केन्द्रीय संस्थाओं तथा श्रावक-श्राविकाओं ने दी भावनाओं को अभिव्यक्ति

23.01.2026, शुक्रवार, छोटी खाटू, डीडवाना-कुचामण (राजस्थान) :माघ शुक्ला पंचमी। जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के मर्यादा महोत्सव के त्रिदिवसीय समारोह के शुभारम्भ का प्रथम दिवस। छोटी खाटू की धरा के पहले तथा जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के 162वें मर्यादा महोत्सव के शुभारम्भ का अवसर। पूरी छोटी खाटू नगरी का उत्साह अपने चरम पर था।

मर्यादा महोत्सव के लिए निर्धारित समय से पूर्व ही मर्यादा समवसरण श्रद्धालुओं की विराट उपस्थिति से जनाकीर्ण बन गया था। जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी विशाल मंच के मध्य विराजमान हुए। महातपस्वी आचार्यश्री ने मंगल महामंत्रों का उच्चारण करते हुए जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के 162वें मर्यादा महोत्सव के त्रिदिवसीय समारोह के शुभारम्भ की घोषणा की।

तदुपरान्त मुनि दिनेशकुमारजी की अगुवाई में चतुर्विध धर्मसंघ ने जयघोष करते हुए ‘मर्यादा गीत’ का संगान किया। महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने मर्यादा के आधारभूत ‘मर्यादा पत्र को बहुत मान-सम्मान के साथ स्थापित किया।

उपासक श्रेणी ने ‘मर्यादाओं का उत्सव हम आज मनाएंगे’ गीत का संगान किया। सेवा के नाम से समर्पित मर्यादा महोत्सव के प्रथम दिन साध्वीवृंद की ओर से साध्वी मुदितयशाजी ने तथा संतवृंद की ओर मुनि कुमारश्रमणजी ने सेवा में नियोजन करने की प्रार्थना की। तदुपरान्त साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी ने आज के अवसर पर उपस्थित जनता को उद्बोधित किया।

इसी बीच युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्रसिंह शेखावत उपस्थित हुए। उन्होंने करबद्ध होकर आचार्यश्री को वंदन कर वहीं मंचस्थ हुए। उन्होंने आचार्यश्री की अभिवंदना में अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करते हुए कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ की आचार्य परंपरा के वर्तमान आचार्यश्री महाश्रमणजी के चरणों की अभिवंदना करता हूं, प्रणाम करता हूं। इस परंपरा के प्रति आस्था, सम्मान व श्रद्धा का भाव है, वह मुझे यहां खींच लाई है। आज मर्यादा महोत्सव का प्रथम दिन है, जो सेवा के लिए निर्धारित है, जिसका संकल्प भी आपसे प्राप्त होगा। यह मेरे लिए भी सौभाग्य का दिन है। मुझे ऐसे महापर्व के दौरान आपके दर्शन का सुअवसर मिला है। भारत की संस्कृति से पूरे विश्व को प्रेरणा मिलती है। आपकी सन्निधि से सेवा का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। हम सभी के मन में राजनीति में पवित्र सेवा के प्रति भावना बनी रहे। आज मेरे यहां बड़ा उत्सव होने के बाद भी मैं आपके दर्शनार्थ उपस्थित हुआ है।

 

आचार्यश्री ने उन्हें मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि आज मर्यादा महोत्सव के प्रथम केन्द्रीय मंत्री श्री गजेन्द्रसिंह शेखावतजी का आना हुआ है। कई राजनेता भी एकदम श्रावक जैसे आ जाते हैं। राजनीति भी सेवा बहुत बड़ा क्षेत्र है, उसमें नैतिकता, धार्मिकता व शुद्धता बनी रहे।

मर्यादा महोत्सव व्यवस्था समिति -छोटी खाटू के अध्यक्ष व महासभा के अध्यक्ष श्री मनसुखलाल सेठिया ने उनका स्वागत किया। वे आचार्यश्री के दर्शन कर पुनः अपने गंतव्य की ओर गतिमान हो गए। आचार्यश्री ने उन्हें मंगल आशीर्वाद भी प्रदान किया।

मर्यादा महोत्सव के प्रथम दिवस पर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने चतुर्विध धर्मसंघ को पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि आज का कार्यक्रम सेवा से संदर्भित है। सेवा एक ऐसा तत्त्व है, जो पुण्य बंध का कारण बनता है। इससे तीर्थंकर नाम गोत्र बंध की प्राप्ति होती है। तीर्थंकर नाम गोत्र का बंध होना भी कितनी ऊंची बात होती है।

सेवा कार्य को कर्म निर्जरा की भावना से करने का प्रयास होना चाहिए। सेवा विनय, समर्पण व निष्काम भाव से सेवा होती है तो वह सेवा बहुत उच्च होती है। आदमी को शारीरिक सेवा के साथ-साथ मानसिक शांति भी दी जा सकती है। मौके पर बहुत सारे कार्यों को छोड़कर सेवा कार्य में जुड़ जाना चाहिए। सेवा करना बहुत बड़ी बात होती है। संयम की साधना अच्छे ढंग से हो, ऐसा प्रयास करना चाहिए।

आचार्यश्री ने तेरापंथ धर्मसंघ के सेवाकेन्द्रों पर आगामी वर्ष में सेवादायी साध्वियों की नियुक्ति की। इसमें आचार्यश्री ने लाडनूं सेवाकेन्द्र में साध्वी कीर्तिलताजी, बीदासर समाधिकेन्द्र में साध्वी प्रांजलप्रभाजी, श्रीडूंगरगढ़ सेवाकेन्द्र में साध्वी लक्ष्यप्रभाजी, गंगाशहर सेवाकेन्द्र में साध्वी त्रिशलाकुमारीजी तथा हिसार उपसेवाकेन्द्र में साध्वी सम्पूर्णयशाजी को सेवादायी साध्वी के ग्रुप में निर्धारित किया। तदुपरान्त आचार्यश्री ने साधु, साध्वियों, समणियों व मुमुक्षुओं सहित चतुर्विध धर्मसंघ को सेवा धर्म के प्रति जागरूक रहने, तन, मन, वचन से भी सेवा करते रहने की प्रेरणा प्रदान की। आचार्यश्री ने कहा कि सभी में सेवा की पुनीत भावना का विकास होना अपेक्षित है।

मंगल प्रवचन के उपरान्त जैन विश्व भारती के पदाधिकारियों ने आचार्यश्री के सम्मुख ‘जय तिथि पत्रक’ लोकार्पित किया तथा मित्र परिषद ने तिथि दर्पण व तिथि पत्रक को आचार्यश्री के समक्ष अर्पित किया। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में मंगल आशीष प्रदान किया।

अमृतवाणी के अध्यक्ष श्री ललितकुमार दुगड़, आचार्य भिक्षु समाधि स्थल, सिरियारी के श्री मर्यादा कोठारी, आचार्यश्री तुलसी शांति प्रतिष्ठान के श्री दीपक आंचलिया, प्रेक्षाध्यान एकेडमी के श्री भैरुलाल चौपड़ा, प्रेक्षा इण्टरनेशनल के अध्यक्ष श्री अरविंद संचेती, जय तुलसी फाउण्डेशन की ओर से श्री बाबूलाल सेखानी, तेरापंथ महिला मण्डल की अध्यक्ष श्रीमती सुनिता बेताला, श्रीमती दिव्या बेताला ने अपनी अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ कन्या मण्डल ने अपनी प्रस्तुति दी। आचार्यश्री ने कन्या मण्डल को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। इस प्रकार अनेक उपक्रमों आदि से जुड़े मर्यादा महोत्सव का प्रथम दिवस के आयोजन का आचार्यश्री के मंगलपाठ से सुसम्पन्न हुआ।

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