businessTextileसूरत सिटी

बजट–2026 : आर्थिक स्थिरता और विकास के रोडमैप पर देश की निगाहें- सूरत कपड़ा उधोग को राहत की उम्मीद

सूरत के कपड़ा व्यापारियों को बजट–2026 से राहत की उम्मीद

सूरत। केंद्र सरकार का आम बजट–2026 आगामी 1 फरवरी 2026 को संसद में प्रस्तुत किया जाएगा। देश की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण लगातार आठवीं बार आम बजट पेश करेंगी।
वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव, महंगाई के दबाव, रोजगार सृजन की चुनौती और घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को देखते हुए यह बजट बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार से अपेक्षा की जा रही है कि बजट–2026 में आर्थिक विकास को गति देने, एमएसएमई सेक्टर को मजबूती, टैक्स संरचना को सरल बनाने और व्यापार-अनुकूल नीतियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उद्योग, व्यापार, किसान और मध्यम वर्ग—सभी की निगाहें इस बजट पर टिकी हुई हैं, जो देश की आर्थिक दिशा तय करेगा।

सूरत के कपड़ा व्यापारियों को बजट–2026 से राहत की उम्मीद
देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब सूरत के कपड़ा व्यापारियों को बजट–2026 से बड़ी राहत की आशा है। व्यापारियों का कहना है कि बीते कुछ समय से कच्चे माल की लागत, मंदी का माहौल और टैक्स से जुड़ी जटिलताओं के कारण कपड़ा व्यापार पर दबाव बना हुआ है।देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब सूरत के कपड़ा व्यापारियों को बजट–2026 से बड़ी राहत की आशा है। व्यापारियों का कहना है कि बीते कुछ समय से कच्चे माल की लागत, मंदी का माहौल और टैक्स से जुड़ी जटिलताओं के कारण कपड़ा व्यापार पर दबाव बना हुआ है।कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि यदि बजट–2026 में जमीनी स्तर की समस्याओं को समझते हुए निर्णय लिए गए, तो इससे सूरत का कपड़ा बाजार ही नहीं, बल्कि देश का संपूर्ण टेक्सटाइल सेक्टर मजबूत होगा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

कपड़ा व्यापारियों की प्रमुख अपेक्षाएं
-इनकम टैक्स एक्ट की धारा 43B(h) में संशोधन या कपड़ा व्यापार को इससे छूट
-व्यापारियों के अनुसार एमएसएमई रजिस्टर्ड उद्यमों को 45 दिन में भुगतान की बाध्यता से बाहरी मंडियों में व्यापार प्रभावित हो रहा है।
-एमएसएमई और बड़े व्यापारियों के लिए समान नियम
-छोटे व्यापारियों का मानना है कि नियमों में असमानता से प्रतिस्पर्धा बिगड़ रही है।
-वर्किंग कैपिटल के लिए आसान और सस्ता ऋण
-बैंकिंग प्रक्रिया सरल हो तथा ब्याज दरों में राहत मिले।
-जीएसटी प्रणाली का सरलीकरण
-रिफंड में देरी और तकनीकी अड़चनों से व्यापारियों को राहत दी जाए।
-कपड़ा उद्योग के लिए विशेष पैकेज
-टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन, एक्सपोर्ट इंसेंटिव और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट की मांग।

आगामी केंद्रीय बजट से सूरत कपड़ा व्यापारियों को बड़ी उम्मीदें
आने वाले केंद्रीय बजट को लेकर सूरत के कपड़ा व्यापारियों में भारी उम्मीदें हैं। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली से पहले शुरू हुई मंदी, कमजोर रिटेल डिमांड, पेमेंट चेन के टूटने और टैक्स नियमों की जटिलताओं ने कपड़ा व्यापार को गहरे संकट में डाल दिया है। इसी को लेकर अलग-अलग व्यापारियों और विशेषज्ञों ने सरकार के सामने अपनी अपेक्षाएं रखी हैं।
MSME रजिस्टर्ड कपड़ा व्यापारियों के लिए इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 43B(H) ने गंभीर समस्या खड़ी कर दी है।
इस नियम के तहत MSME रजिस्टर्ड उद्यमियों से की गई खरीद का भुगतान 45 दिनों के भीतर करना अनिवार्य है, जबकि लार्ज स्केल ट्रेडर्स इस नियम से बाहर हैं। इसके चलते जनवरी से ही बाहर की मंडियों के व्यापारी MSME रजिस्टर्ड सूरत व्यापारियों से माल लेना कम कर देते हैं और या तो लार्ज स्केल व्यापारियों से या फिर अनरजिस्टर्ड व्यापारियों से खरीदारी करने लगते हैं। इसका सीधा नुकसान छोटे व्यापारियों को उठाना पड़ रहा है। मांग है कि या तो यह नियम पूरे साल सभी पर समान रूप से लागू हो या फिर माइक्रो, स्मॉल, मीडियम और लार्ज सभी व्यापारियों के लिए एक जैसा किया जाए।


(रंगनाथ सारड़ा)
सेक्रेटरी – अशोका टावर मार्केट
पूर्व प्रवक्ता व डायरेक्टर – फोस्टा

केंद्रीय बजट 2026–27 से टेक्सटाइल सेक्टर को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई है। उन्होंने 10,000 रुपये तक के परिधानों पर एक समान 5% GST लागू करने की मांग की है।
बोथरा ने MSME की कार्यशील पूंजी की सुरक्षा हेतु GST अधिनियम की धारा 16(2)(AA) में संशोधन और भुगतान सुरक्षा सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया।
उन्होंने पीएम मित्र पार्कों को पूर्ण गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने तथा PLI योजना का लाभ छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) तक पहुँचाने की अपेक्षा जताई।
साथ ही, अंडर-वैल्यूड आयात पर सख्त रोक, व्यापारियों एवं बुनकरों के लिए पेंशन और बीमा योजना लागू करने की भी मांग की गई है।
श्री बोथरा के अनुसार, इन सुधारों से टेक्सटाइल उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगें।


चम्पालाल बोथरा
राष्ट्रीय चेयरमैन
कैट (CAIT) टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी

कपड़ा व्यापार इस समय ऑक्सीजन पर चल रहा है।करीब 70 प्रतिशत कपड़ा व्यापारी बेहद कमजोर आर्थिक स्थिति में हैं। अगर सरकार ने कपड़ा व्यापारियों के लिए सब्सिडी के साथ कम ब्याज पर लोन की व्यवस्था नहीं की, तो आने वाले समय में हालात और बिगड़ सकते हैं। व्यापार को बचाने के लिए बजट में विशेष राहत पैकेज जरूरी है।


(राम रतन बोहरा)
कपड़ा व्यापारी

GST और टैक्स सिस्टम में व्यावहारिक सुधार की जरूरत है।वर्तमान में 40 लाख रुपये की GST रजिस्ट्रेशन सीमा बहुत कम है, जिसे बढ़ाकर 1 करोड़ किया जाना चाहिए। साथ ही GSTR-1 में लेट फीस का सख्त प्रावधान लागू किया जाए ताकि सभी टैक्सपेयर्स समय पर रिटर्न फाइल करें और सामने वाले व्यापारी को समय पर ITC मिल सके। इसके अलावा ओल्ड और न्यू टैक्स रिजीम में टैक्स स्लैब को केवल तीन श्रेणियों तक सीमित किया जाना चाहिए।


(नारायण शर्मा)
टैक्स कंसल्टेंट

महंगाई और शिक्षा पर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।हर साल की तरह इस बार भी गृहणियों की सबसे बड़ी मांग यही है कि महंगाई पर काबू पाया जाए। आज मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चों को उच्च शिक्षा नहीं दिला पा रहे हैं। निजी स्कूलों में हो रही मनमानी पर रोक लगाने के लिए सरकार को सख्त कानून बनाना चाहिए।


(रीता बेन दाधीच)
गृहणी

दलाली पर एक साथ GST और TDS व्यापारियों पर दोहरा बोझ है।दलाली पर 18 प्रतिशत GST और 2 प्रतिशत TDS दोनों एक साथ लगाए जाने से व्यापारियों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। मांग है कि दलाली से GST को पूरी तरह हटाकर केवल TDS तक सीमित किया जाए। साथ ही पैकिंग मटेरियल जैसे जरूरी इनपुट्स पर लगने वाली 18 प्रतिशत GST को घटाकर 12 या 5 प्रतिशत किया जाए, क्योंकि इसमें रिफंड की कोई व्यवस्था नहीं है।


(पुरुषोत्तम अग्रवाल)
व्यापारी – रघुवीर बिजनेस एम्पायर

MSME सेक्शन 43B(H) के कारण छोटे ट्रेडर्स सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।45 दिनों में अनिवार्य पेमेंट क्लियर करने की शर्त के चलते बाहर की मंडियों के व्यापारी MSME रजिस्टर्ड सूरत व्यापारियों से दूरी बना रहे हैं। या तो यह नियम पूरे साल सभी पर लागू किया जाए या फिर छोटे-बड़े सभी व्यापारियों के लिए समान बनाया जाए

(मुकेश कुमार डागा)
एजेंट एवं कपड़ा व्यापारी

₹2500 से ऊपर रेडीमेड कपड़ों पर 18% GST से कारोबार धीमा पड़ा है।आज सूट, साड़ी, लहंगा, शेरवानी जैसे अधिकतर परिधानों की कीमत 2500 रुपये से ज्यादा होती है। ऐसे में 18 प्रतिशत GST से आम ग्राहकों पर बोझ बढ़ा है और बिक्री प्रभावित हुई है। सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।


(प्रमोद अग्रवाल)
व्यापारी – मिलेनियम मार्केट-4

सिंथेटिक और रेडीमेड कपड़ों पर GST 5% किया जाए।
धागा, कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट—पूरी चेन में टैक्स एक समान होना चाहिए। इससे कीमतें कम होंगी और बिक्री बढ़ेगी। साथ ही MSME से जुड़े नियमों में बदलाव कर 45 दिन की सीमा को 90 दिन किया जाए या छोटे-बड़े व्यापारियों के बीच का भेदभाव खत्म किया जाए।

 


(विकास जैन)
व्यापारी – महावीर मार्केट

दिवाली से पहले आई मंदी ने व्यापार की कमर तोड़ दी है।ग्रे कपड़े की कीमतें लगातार गिर रही हैं, रिटेल में काम नहीं है और बाहर की मंडियों से पेमेंट नहीं आ रहा। व्यापारी पेमेंट मांगे तो माल वापस आ जाता है। सरकार से मांग है कि सभी दुकानदारों के लिए आर्थिक पैकेज घोषित किया जाए और ₹2500 से ऊपर 18% GST की सीमा बढ़ाकर ₹10,000 की जाए।


(आनंदराज वैष्णव)
अध्यक्ष – रतन मार्केट, सूरत

सूरत के कपड़ा व्यवसायियों को आगामी बजट से बहुत आशा है सूरत के रिंग रोड कपड़ा बाज़ार को ऊंचाइयों पर ले जाने हेतु पूरे विश्व में में हम सरलतापूर्वक एक्सपोर्ट कर सकें इसके लिए एक समिति का अलग से गठन किया जाना चाहिएजिससे हम चीन से ज्यादा प्रॉडक्शन और अच्छी क्वालिटी पुरे विश्व में बना कर दे सके


अरुण कुमार झंवर
डायरेक्टर
श्री राजस्था।न वस्त्र व्यापार संघ, सूरत

**समस्याएं बहुत, समाधान नहीं

कपड़ा व्यापारियों की जीएसटी व टैक्स व्यवस्था पर सरकार से सीधी मांग**
सूरत। देश के कपड़ा व्यापार, विशेषकर सूरत टेक्सटाइल मार्केट से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि सरकार द्वारा बनाए गए टैक्स और जीएसटी नियमों में समस्याएं तो बहुत हैं, लेकिन उनके व्यावहारिक समाधान अब तक नहीं निकाले गए हैं। व्यापारियों के अनुसार नीतियां कागजों तक सीमित रह गई हैं, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। व्यापारियों ने आगामी बजट से निम्न बिंदुओं पर ठोस निर्णय की मांग की है—
● जीएसटी रजिस्ट्रेशन लिमिट बढ़ाने की मांग
वर्तमान में जीएसटी रजिस्ट्रेशन की सीमा 40 लाख रुपये है, जिसे अव्यावहारिक बताते हुए व्यापारियों ने इसे बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये करने की मांग की है, ताकि छोटे व्यापारियों को अनावश्यक टैक्स बोझ से राहत मिल सके।
● 180 दिन में पेमेंट न मिलने पर ITC ब्लॉक व्यवस्था सिर्फ कागजों में
जीएसटी कानून में 180 दिन में भुगतान न होने पर ITC ब्लॉक करने का प्रावधान है, लेकिन व्यापारियों का कहना है कि यह नियम सिर्फ कागजों तक सीमित है, जमीनी स्तर पर इसका कोई प्रभावी क्रियान्वयन नहीं है।
● इनकम टैक्स धारा 43B(H) MSME पर सिर्फ साल के अंतिम महीनों में असरदार
इनकम टैक्स की धारा 43B(H) MSME व्यापारियों के लिए केवल वित्त वर्ष के अंतिम दो महीनों में ही समस्या बनती है। पूरे साल इस पर सरकार की ओर से कोई ठोस और स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं, जिससे व्यापारियों में असमंजस बना रहता है।
● कपड़ों पर जीएसटी दरों में विरोधाभास
कपड़े पर 5% जीएसटी लागू है, लेकिन ₹2500 से अधिक कीमत होने पर जीएसटी दर 12% से बढ़ाकर 18% कर दी गई है। व्यापारियों का सवाल है कि महिलाओं के परिधानों पर अलग-अलग जीएसटी दरें लगाकर मध्यमवर्गीय परिवार पर अतिरिक्त बोझ क्यों डाला जा रहा है। इस पर सरकार को पुनः विचार करना चाहिए।
● GSTR-1 में लेट फीस का सख्त प्रावधान जरूरी
व्यापारियों की मांग है कि जीएसटी पोर्टल पर GSTR-1 में लेट फीस का प्रभावी प्रावधान लागू किया जाए, ताकि सभी व्यापारी समय पर रिटर्न फाइल करें और सामने वाले को ITC लेने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
● दलाली और पैकिंग मटेरियल पर 18% जीएसटी में कटौती की मांग
दलाली और पैकिंग मटेरियल जैसे आवश्यक खर्चों पर लगने वाली 18% जीएसटी दर को अत्यधिक बताया गया है। व्यापारियों ने इन पर जीएसटी दर घटाने और नियमों में बदलाव की मांग की है।
● एलआईसी व मेडिकल प्रीमियम पर आम आदमी को राहत नहीं
सरकार ने एलआईसी और मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर जीएसटी हटाया है, लेकिन व्यापारियों का कहना है कि कंपनियों द्वारा प्रीमियम में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है, जिस पर कोई नियंत्रण नहीं है। ऐसे में आम आदमी पर बोझ अब भी बना हुआ है।
● GSTR-2B की जगह 2A लाने पर सवाल
व्यापारियों ने सवाल उठाया है कि GSTR-2B की जगह 2A को लागू करने का निर्णय सरकार की किस समझदारी को दर्शाता है, जबकि इससे ITC मिलान और अधिक जटिल हो गया है।
● जीएसटी रिटर्न फाइलिंग को सरल बनाने की मांग अधूरी
सरकार द्वारा जीएसटी रिटर्न फाइलिंग को सरल बनाने के दावे किए गए थे, लेकिन हकीकत में छोटे और अनावयस्क व्यापारियों पर रिटर्न फाइलिंग का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
● टैक्स ऑडिट में 3CB रिपोर्टिंग से छोटे व्यापारी परेशान
छोटे व्यापारियों पर भी कंपनी एक्ट के अनुसार टैक्स ऑडिट में 3CB रिपोर्टिंग लागू कर दी गई है। व्यापारियों ने इसे अव्यावहारिक बताते हुए इस प्रावधान को वापस लेने की मांग की है।
● पेमेंट न मिलने पर सख्त कानून की मांग
व्यापारियों के भुगतान लंबे समय से अटके रहने की समस्या को देखते हुए जीएसटी विभाग द्वारा पेमेंट डिफॉल्ट पर कड़े कानून बनाए जाने की मांग की गई है, ताकि व्यापार में विश्वास बना रहे।
व्यापारियों का कहना है कि जब तक इन समस्याओं पर सरकार ठोस और व्यावहारिक फैसले नहीं लेती, तब तक कपड़ा व्यापार और छोटे व्यापारी लगातार दबाव में बने रहेंगे। आगामी बजट से सूरत सहित देशभर के व्यापारियों को इन्हीं मुद्दों पर ठोस राहत की उम्मीद है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button