विश्व ध्यान दिवस पर देशभर में आत्म-ध्यान का व्यापक आयोजन, हजारों साधकों ने अनुभूत की आंतरिक शांति

सत्य वही है जो तीनों कालों में अपरिवर्तित रहता है। जीव तत्व ही मूल सत्य है और मुक्ति के लिए अपने स्वरूप को जानना अनिवार्य है। जो स्वयं को, आत्मा को नहीं जानता, वह मुक्त नहीं हो सकता। मुक्त होने का सर्वोत्तम मार्ग आत्मा का ध्यान ही है। इन्हीं आध्यात्मिक संदेशों के साथ विश्व ध्यान दिवस के अवसर पर देशभर में आत्म-ध्यान के व्यापक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इस अवसर पर वीतराग साधिका जी ने अरिहंत वाणी के माध्यम से साधकों को अनादिकाल के प्रतिक्रमण एवं आलोचना का प्रयोग करवाया। आत्म-चिंतन और आत्म-निरीक्षण के इस प्रयोग से साधकों ने गहन शांति और आत्मिक संतुलन का अनुभव किया।
विश्व ध्यान दिवस पर गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, जम्मू, उत्तर प्रदेश एवं तमिलनाडु सहित अनेक राज्यों में हजारों साधक-साधिकाओं ने आत्म-ध्यान में सहभागिता की। विभिन्न केन्द्रों पर साधु-साध्वीवृंद का सान्निध्य रहा, जिससे कार्यक्रमों को विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त हुई।
महाराष्ट्र के आनंदधाम, अहिल्यानगर में युवाचार्य श्री महेन्द्रऋषि जी, प्रवर्तक श्री कुन्दनऋषि जी, प्रबुद्ध विचारक श्री आदर्शऋषि जी, सलाहकार श्री तारकऋषि जी, श्री लोकेशऋषि जी सहित अनेक साधु-साध्वी ठाणाओं की उपस्थिति में लगभग 600 साधक-साधिकाएं सहभागी बनीं। राजस्थान के शाहपुरा, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, मध्यप्रदेश के इंदौर व जावरा, पंजाब के लुधियाना, बठिंडा, पटियाला, हरियाणा के पंचकुला व अम्बाला, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, जम्मू तथा तमिलनाडु के विभिन्न केन्द्रों पर भी उल्लेखनीय सहभागिता रही।

सूरत, पुणे, मालेगांव, गोरेगांव, संभाजीनगर, रायपुर सहित अनेक शहरों में बड़ी संख्या में साधकों ने आत्म-ध्यान सीखा और उसका अभ्यास किया। इंदौर के महावीर भवन में लगभग 300 साधकों की सहभागिता रही, जबकि सूरत, पुणे और मालेगांव जैसे केन्द्रों पर भी सैकड़ों साधक-साधिकाएं उपस्थित रहीं।
इस विशाल आयोजन को सफल बनाने में श्री ऑल इंडिया श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन कॉन्फ्रेंस की आत्म-ध्यान प्रचार-प्रसार योजना समिति एवं शिवाचार्य आत्म-ध्यान फाउंडेशन के सभी सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम ने आत्म-ज्ञान, आत्म-शांति और मुक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।




