
दक्षिण भारत में आए डिटवाह साइक्लोन ने सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर बड़ा असर डाला है। चेन्नई व तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में लगातार भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त है और कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। इसका सीधा प्रभाव कपड़ा व्यापार पर पड़ा है, जिससे सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को शुरुआती अनुमान के अनुसार 200 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान झेलना पड़ा है।
दक्षिण भारत—विशेषकर तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और केरल—पोंगल सीजन में सूरत के साड़ी, ड्रेस मटेरियल, सूटिंग-शर्टिंग व फैंसी फैब्रिक्स का सबसे बड़ा बाजार है। यह सीजन हर साल 15 नवंबर से शुरू होकर दिसंबर में अपने चरम पर पहुंचता है। पिछले वर्ष इस बाजार से 900 करोड़ से अधिक का व्यापार हुआ था, जबकि इस वर्ष उद्योग को 800–1000 करोड़ रुपए की बिक्री की उम्मीद थी।
लेकिन सीजन की शुरुआत में आए साइक्लोन के कारण बाज़ार ठप पड़ गए हैं। ग्राहकों की मार्केट में आवाजाही लगभग बंद है और ट्रांसपोर्टेशन बाधित होने से समय पर सप्लाई भी नहीं पहुंच पा रही। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो अनुमान है कि 25% तक व्यापार प्रभावित हो सकता है, जिससे लगभग 250 करोड़ रुपए का सीधा असर पड़ेगा।
पोंगल एक तय, समय-आधारित त्यौहार है। इसलिए मौसम अनुकूल न होने पर स्थानीय बाजारों में खरीदी कम होने का डर है। व्यापारी चिंतित हैं कि अगर पोंगल सीजन का माल समय पर नहीं बिक पाया तो बड़ी मात्रा में माल वापसी की नौबत आ सकती है। इससे ट्रेडर्स पर वित्तीय दबाव और बढ़ेगा।दक्षिण भारत में सूरत का कुल कपड़ा व्यापार 30–35% तक है। दीपावली के बाद पोंगल इस उद्योग के लिए सबसे बड़ा सीजन माना जाता है। लेकिन इस बार डिटवाह साइक्लोन ने व्यापारियों की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए पूरे टेक्सटाइल सेक्टर में गंभीर चिंता पैदा कर दी है।




