धर्मराजस्थानसामाजिक/ धार्मिक

पंचाचार में रहें प्रवर्धमान : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण

-भिक्षु चेतना वर्ष महाचरण : दसवें दिन आचार्यश्री ने आचार संपदा को किया वर्णित

-गुरुदर्शन करने वाली अनेक साध्वियों ने श्रीचरणों में अर्पित की प्रणति

-विद्यार्थियों ने श्रीमुख से स्वीकार किए सद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति के संकल्प

24.12.2025, बुधवार, कंटालिया, पाली (राजस्थान) :राजस्थान के पाली जिले में अवस्थित कंटालिया गांव। जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के आद्य अनुशास्ता, महामना भिक्षु स्वामी की जन्मस्थली। वर्तमान समय में महामना की जन्मस्थली में उनके परंपर पट्टधर आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ तेरह रात्रियों का प्रवास कर रहे हैं। इसके साथ ही अपने आद्य अनुशास्ता की जन्मभूमि में आचार्य भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष ‘भिक्षु चेतना वर्ष’ के महाचरण का भव्य एवं आध्यात्मिक समायोजन भी हो रहा है, जिसने पूरे कंटालिया के वातावरण को आध्यात्मिक रंग से सराबोर कर दिया है।

बुधवार को महामना भिक्षु के परंपर पट्टधर आचार्यश्री महाश्रमणजी की पावन सन्निधि में ‘आचार्य भिक्षु जन्मत्रिशताब्दी वर्ष ‘भिक्षु चेतना वर्ष’ के महाचरण के दसवें दिन के मुख्य कार्यक्रम में सर्वप्रथम मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी ने गीत का संगान किया। आज के निर्धारित विषय ‘आचार्य भिक्षु की आचार निष्ठा’ पर साध्वी मुदितयशाजी ने अपनी विचाराभिव्यक्ति दी।

तदुपरान्त तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने समुपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को मंगल पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि अहिंसा, संयम और तप को आचार के रूप में देख सकते हैं तथा विश्लेषित भी कर सकते हैं। अहिंसा भी आचार है, संयम भी आचार और तप भी आचार से ही जुड़ा हुआ है। आज का विषय है- ‘आचार्यश्री भिक्षु की आचार निष्ठा।’ इसमें उनकी नियमों व आचार के निष्ठा का दर्शन कर सकते हैं। साधु के लिए आचार एक धन अथवा संपदा के समान है। भगवान महावीर ने भी कितना आचार को पाला होगा और वे फिर निर्वाण को प्राप्त हो गए।

आचार्यश्री भिक्षु आचार के बहुत पक्षधर रहे हैं। उनमें जो ज्ञानवत्ता और प्रबुद्धता थी तो उनका आचार और निखार को प्राप्त था। उनकी आचार संपदा तो उनकी बहुत तगड़ी थी। उनके समय में साध्वियों के थोड़ा कपड़ा अधिक निकल गया तो आहार-पानी का संबंध तोड़ लिया। आचार का पक्ष ऐसा है कि कठिनाइयों की स्थिति में आचार की शुद्धता का प्रयास होना चाहिए। जहां समुदाय होता है, वहां सबका विवेक एक जैसा हो, ऐसा संभव नहीं होता। किसी से कोई आचार में प्रमाद हो जाए तो उसका उचित समय पर ध्यान दिलाने का भी प्रयास होता रहे। आचार्यश्री भिक्षु ने आचार की निष्ठा का तो कहना ही क्या। उनकी आचार निष्ठा तो हम सभी के लिए अनुकरणीय है। अपने आचार के प्रति छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देना चाहिए, उससे आचार और पुष्ट बन सकता है।

यह महाचरण हम सभी के ज्ञान वर्धन में सहायक बन रहा है। साधु-साध्वियों व समणियों की प्रस्तुतियां भी हो रही हैं। यह भी अच्छी बात होती है कि इतने भाषण आदि के लिए पहले कितनी तैयारी करनी होती है। हम सभी में आचार्यश्री भिक्षु की तरह आचार संपदा पुष्ट होती रहे और पंचाचार में प्रगतिमान रहें, यह काम्य है।

आज गुरुदर्शन करने वाली साध्वियों के सिंघाड़ों ने संतवृन्द से खमतखामणा की। संतों की ओर से मुनि कुमारश्रमणजी ने मंगलकामना की। आचार्यश्री ने साध्वियों को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। गुरुदर्शन करने वाली साध्वी उर्मिलाकुमारीजी ने अपने हृदयोद्गार व्यक्त करते हुए अपनी सहवर्ती साध्वियों के साथ गीत का संगान किया। साध्वी प्रज्ञाश्रीजी ने अपनी आंतरिक भावना को व्यक्त करते हुए सहवर्ती साध्वियों संग गीत को प्रस्तुति दी। साध्वी हेमलताजी, साध्वी मंगलप्रभाजी के सिंघाड़े ने संयुक्त रूप से गीत को प्रस्तुति दी। महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय के विद्यार्थियों को आचार्यश्री की अनुज्ञा से प्रेरणा प्रदान की। तदुपरान्त आचार्यश्री ने भी विद्यार्थियों को मंगल आशीर्वचन प्रदान करते हुए सद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति का संकल्प स्वीकार कराया।

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