Uncategorized

नए उभरते बाज़ारों पर फोकस से भारत के टेक्सटाइल एवं गारमेंट निर्यात को मिलेगी नई गति: CAIT

ओमान के साथ CEPA गेम-चेंजर, कनाडा व इजरायल से समझौतों में तेज़ी की मांग

नई दिल्ली। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी ने भारत के टेक्सटाइल और गारमेंट निर्यात को नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार से नीतिगत सहयोग और रणनीतिक हस्तक्षेप की मांग की है। CAIT का कहना है कि बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य में अब पारंपरिक निर्यात बाज़ारों पर निर्भरता कम कर नए उभरते अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों पर केंद्रित निर्यात रणनीति अपनाना समय की आवश्यकता बन गया है।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुसार वर्तमान में भारतीय टेक्सटाइल निर्यात अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे सीमित बाज़ारों पर अत्यधिक निर्भर है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण इस निर्भरता से सालाना लगभग 4–5 अरब डॉलर तक का दबाव देखने को मिल रहा है। CAIT का मानना है कि इसका प्रभावी समाधान ओमान, ऑस्ट्रेलिया, यूएई और मॉरीशस जैसे देशों के साथ हुए व्यापार समझौतों का समुचित लाभ उठाने तथा नए बाज़ारों की सक्रिय खोज में निहित है।
CAIT की टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन चम्पालाल बोथरा ने बताया कि मध्य पूर्व, अफ्रीका, पूर्वी यूरोप, पूर्वी एशिया और लैटिन अमेरिका में लगभग 40 नए संभावित निर्यात बाज़ार उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 18 दिसंबर 2025 को भारत और ओमान के बीच हस्ताक्षरित व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) भारतीय टेक्सटाइल उद्योग के लिए एक अहम मील का पत्थर साबित होगा। इस समझौते के तहत भारतीय टेक्सटाइल एवं गारमेंट उत्पादों को ओमान में शून्य आयात शुल्क (Zero Duty) का लाभ मिलेगा, जिससे खाड़ी देशों में भारत को एक मजबूत गेटवे प्राप्त होगा।
CAIT ने सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि कनाडा के साथ व्यापार वार्ता पुनः आरंभ होना सकारात्मक संकेत है और इसे शीघ्र अंतिम रूप दिया जाना चाहिए। वहीं इजरायल के साथ प्रस्तावित दो-चरणीय FTA में पहले चरण में टेक्सटाइल एवं गारमेंट जैसे क्षेत्रों को शामिल करने की मांग भी की गई है। इसके अलावा ब्रिटेन तथा EFTA देशों (स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे आदि) के साथ हुए समझौतों का वास्तविक लाभ ज़मीनी स्तर तक निर्यातकों को मिलना आवश्यक बताया गया।
CAIT ने सरकार को दिए गए सुझावों में नए उभरते बाज़ारों के लिए विशेष एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन, उत्पाद-विशेष टैरिफ रणनीति, सतत उत्पादन को प्रोत्साहन, MSME को तकनीकी व वित्तीय सहायता तथा लॉजिस्टिक्स सुधार पर विशेष ज़ोर दिया है।
चम्पालाल बोथरा ने कहा कि भारत के टेक्सटाइल एवं गारमेंट निर्यात का भविष्य नए उभरते बाज़ारों में निहित है। यदि ओमान और ऑस्ट्रेलिया जैसे समझौतों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए और कनाडा व इजरायल के साथ FTA वार्ताओं को तेज़ी दी जाए, तो भारत वैश्विक टेक्सटाइल वैल्यू-चेन में नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि FOSTTA/CAIT लंबे समय से FTA की मांग करता आ रहा है और सरकार द्वारा लाई गई मौजूदा तेज़ी से MSME और ट्रेडर्स को सीधा लाभ मिलेगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button