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मुनि स्वात्म सागर महाराज की विनयांजलि सभा आज

क्षपक मुनि श्री 108 स्वात्म सागर जी महाराज का समता भाव से देवलोक गमन

सूरत। क्षपक मुनि श्री 108 स्वात्म सागर जी महाराज ने दिनांक 24 दिसंबर 2025, बुधवार को सायं 5.40 बजे समता पूर्वक अपने नश्वर देह का त्याग कर देवलोक गमन किया। उनके समाधि संस्कार श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, अहुरा नगर में संपन्न हुए।
गुरुवार सुबह 9 बजे अहुरा नगर से मुनि श्री की डोल यात्रा अतिशय क्षेत्र कतारगाम दिगंबर जैन मंदिर के लिए रवाना हुई, जहां विधिवत अग्नि संस्कार किया गया। इस डोल यात्रा में समाज के 1000 से अधिक श्रद्धालु सम्मिलित हुए और नम आंखों से मुनि श्री को अंतिम विदाई दी।
उल्लेखनीय है कि मुनि श्री की दीक्षा 14 दिसंबर 2025 को कतारगाम दिगंबर जैन मंदिर में ही हुई थी तथा अग्नि संस्कार भी उसी पावन स्थल पर संपन्न हुआ। अल्पकालीन किंतु अत्यंत प्रभावशाली दस दिवसीय संयम जीवन में मुनि श्री निरंतर धर्म आराधना, आत्म साधना और समता भाव में लीन रहे।
अपने मर्यादित संयम जीवन के दौरान मुनि श्री ने अध्यात्म की सुगंध चारों ओर फैलाकर बड़जात्या परिवार एवं जैन शासन का गौरव बढ़ाया। उनके सरल जीवन, शांत स्वभाव और वैराग्यपूर्ण आचरण से समाज को गहन प्रेरणा मिली।
मुनि श्री 108 स्वात्म सागर जी महाराज की स्मृति में विनयांजलि सभा आज आयोजित की जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में साधु-साध्वीजन, समाजजन एवं श्रद्धालु उपस्थित होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
मुनि श्री का देवलोक गमन जैन समाज के लिए अपूरणीय क्षति है, किंतु उनका तप, त्याग और संयममय जीवन सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

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