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MSME संकट का समाधान सज़ा नहीं, पारदर्शी भुगतान व्यवस्था है: CAIT

धारा 43B(h) से बढ़ा डर, ‘इनवॉइस–पेमेंट लिंकिंग’ को बताया व्यावहारिक रास्ता – चम्पालाल बोथरा

देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) इस समय गंभीर संकट से गुजर रहे हैं, लेकिन इसका कारण ऑर्डर की कमी नहीं बल्कि समय पर भुगतान न मिलना है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी ने स्पष्ट किया है कि आयकर अधिनियम की धारा 43B(h) इस मूल समस्या का समाधान नहीं कर पा रही, बल्कि इससे MSME सेक्टर में भय और अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
CAIT टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन श्री चम्पालाल बोथरा ने कहा कि यह धारा केवल बैंक ऋण पर केंद्रित है, जबकि व्यापार की वास्तविक रीढ़ ‘ट्रेड क्रेडिट’ है, जो लगभग 80 प्रतिशत वर्किंग कैपिटल को संचालित करता है। टेक्सटाइल, गारमेंट और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों में भुगतान चक्र स्वाभाविक रूप से 60 से 120 दिनों का होता है, ऐसे में 45 दिन की बाध्यता व्यवहारिक नहीं है और यह MSME को अनजाने में अपराधी बना रही है।
धारा 43B(h) के चलते खरीदार आयकर दंड से बचने के लिए MSME से खरीद कम कर बड़े उद्योगों को प्राथमिकता देने लगे हैं। कई छोटे उद्यमी MSME पंजीकरण से बाहर निकलने को मजबूर हो रहे हैं, वहीं निवेश पर भी ब्रेक लग गया है, जिसका सीधा असर “वोकल फॉर लोकल” और स्थानीय रोजगार पर पड़ रहा है।
इस स्थिति से निपटने के लिए CAIT ने सरकार को एक दंडात्मक व्यवस्था के बजाय तकनीक आधारित समाधान अपनाने का सुझाव दिया है। बोथरा के अनुसार, GSTN और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को जोड़कर ‘इनवॉइस–पेमेंट लिंकिंग’ की व्यवस्था की जाए, जिससे यह साफ पता चल सके कि भुगतान समय पर हुआ है या नहीं। साथ ही, कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग उनके वास्तविक भुगतान व्यवहार के आधार पर तय की जाए।
CAIT ने समय पर भुगतान करने वाले खरीदारों को आसान बैंक ऋण, बेहतर क्रेडिट रेटिंग और सरकारी योजनाओं व टेंडरों में प्राथमिकता देने की भी मांग की है। इसके अलावा, लगातार भुगतान में देरी करने वाली कंपनियों की पहचान के लिए पारदर्शी डेटा और अर्ली वार्निंग सिस्टम लागू करने तथा सेक्टर-वार लचीली भुगतान नीति बनाने पर भी जोर दिया गया है।
CAIT की टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी ने केंद्र सरकार से मांग की है कि आयकर अधिनियम की धारा 43B(h) को तत्काल स्थगित या संशोधित किया जाए और जमीनी हकीकत के आधार पर एक नया, व्यावहारिक एवं तकनीक-आधारित “पेमेंट प्रोटेक्शन एक्ट” लाया जाए, ताकि MSME को वास्तविक सुरक्षा मिल सके और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की जा सके।

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