
सूरत। द साउदर्न गुजरात चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के जीएफआरआरसी (ग्लोबल फैब्रिक रिसोर्स एंड रिसर्च सेंटर) द्वारा 1 से 8 दिसंबर 2025 तक नानपुरा स्थित “समृद्धि” में ‘टेक्सटाइल पर्व’ का आयोजन किया गया है। सोमवार, 1 दिसंबर को पहले दिन आयोजित विशेष सत्र में कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI), नई दिल्ली के चेयरमैन अश्विन चंद्रन ने एमएमएफ (मैन-मेड फाइबर) सेगमेंट में MSME को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने की रणनीतियों पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया।
चेम्बर अध्यक्ष निखिल मद्रासी ने कहा कि सूरत का टेक्सटाइल उद्योग देश के एमएमएफ क्षेत्र में अहम योगदान देता है और MSME इकाइयों के लिए वैश्विक बाजार में विस्तार की अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने बताया कि टेक्सटाइल पर्व में विशेषज्ञों द्वारा दिए जा रहे विभिन्न सत्र उद्योग के नवाचार, कौशल विकास, उत्पादन क्षमता में वृद्धि और एक्सपोर्ट को गति देने में सहायक होंगे।
सत्र को संबोधित करते हुए अश्विन चंद्रन ने कहा कि विश्व के कुल फाइबर उपभोग में 60% हिस्सा अब एमएमएफ का है, जबकि दो दशक पहले यह स्थिति उलटी थी। परफॉर्मेंस वियर, एथलीशियर, टेक्निकल टेक्सटाइल और सस्टेनेबल मटेरियल की बढ़ती मांग से एमएमएफ की खपत 2030 तक 100 मिलियन टन होने का अनुमान है। यह भारत के लिए बड़े अवसर प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का बड़ा पॉलिएस्टर उत्पादक होने के बावजूद वैल्यू-एडेड एमएमएफ एक्सपोर्ट में अपेक्षित उपस्थिति दर्ज नहीं करा पाया है, जबकि चीन, वियतनाम और तुर्की ने तेजी से इनोवेशन आधारित मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया है।
उन्होंने कहा कि सूरत देश का एकमात्र क्लस्टर है जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता रखता है। ग्लोबल बायर्स अब बड़े पैमाने पर सप्लाई चाहते हैं और कम सप्लायरों के साथ काम करते हैं। ऐसे में MSME को स्केल-अप, इनोवेशन और ग्लोबल सप्लाई चेन में इंटीग्रेशन की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में चेम्बर के उपाध्यक्ष अशोक जीरावाला, पूर्व अध्यक्ष विजय मेवावाला, मानद कोषाध्यक्ष सीए मितिष मोदी समेत अनेक उद्योगपति उपस्थित रहे। चेम्बर के मानद मंत्री बिचल जरीवाल ने आभार व्यक्त किया, जबकि टेक्सटाइल टास्क फोर्स के चेयरमैन आशिष गुजरात ने अतिथि का परिचय कराया। सत्र का संचालन GFRRC के को-चेयरमैन अमरीष भट्ट ने किया




