चातुर्मास प्रवास में अवध निवासियों का सहयोग अनुमोदनीय रहा-आचार्य शिवमुनि

सूरत।ध्यान योगी आत्मज्ञानी सद्गुरुदेव आत्मानुशास्ता आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. आदि ठाणा-10 का वर्ष 2025 का चातुर्मास सामूहिक महामंत्र नवकार जाप एवं चातुर्मासिक पक्खी की आराधना के साथ सानन्द सम्पन्न हुआ। चातुर्मास प्रवास में आत्म ध्यान धर्म यज्ञ, ध्यान साधना, तपस्या, पूज्यवरों के दैनिक मंगल उद्बोधन के साथ अनेक चातुर्मासिक गतिविधियां सम्पन्न हुई। चातुर्मास प्रवास में देशभर से अनेक श्रावक-श्राविकाएं, दीक्षार्थी, गुरुभक्त, उद्योगपति, सरकारी पदाधिकारी, विभिन्न सामाजिक संगठन के कार्यकर्त्ताओं का मंगल आशीर्वाद हेतु निरंतर आवागमन बना रहा।
आचार्य भगवन ने चातुर्मास पूर्णाहुति पर अवध संगरीला वासियों एवं बाहर से आए हुए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए अपने मंगल उद्बोधन में फरमाया कि अवध संगरीला में थोड़े ही घर हैं और स्थान भी छोटा है फिर भी चातुर्मास में किसी भी कमी का अहसास ही नहीं हुआ। चाहे पर्युषण पर्व हुआ हो, या चातुर्मास प्रवेश हुआ हो, ध्यान साधना के शिविर हुए हों, तपस्याएं हुई, मुमुक्षु दीक्षार्थी आए हो या दर्शनार्थी श्रद्धालु आए हो सभी प्रकार की व्यवस्थाओं में श्रावकों ने जो सहयोग दिया वह अनुमोदनीय है।
उन्होंने आगे फरमाया कि गृहस्थ एवं साधु-संतों का परस्पर संबंध है। गृहस्थ साधु-संतों को आहार बहराते हैं, संघ की सेवा करते हैं। गृहस्थ आधार है, हमें जो भी चाहिए है वह हम गृहस्थ से ही याचना करते हैं चाहे वह आहार हो, वस्त्र हो या रहने का स्थान हो। साधु-संतों की की गई सेवा महान निर्जरा का कारण बनती है। साथ ही उन्होंने सभी 9 मुनिराजों के प्रति उनकी सेवा भावना की अनुमोदना की।
आचार्य भगवन ने आगे फरमाया कि हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि जीव के कल्याण के लिए पंचम काल में अरिहंत परमात्मा सीमंधर स्वामी की वाणी मिली है और वीतराग साधिका निशाजी का पुरुषार्थ, सहयोग मिला वह सभी के लिए कल्याणकारी है। संसार में शांति नहीं है, सभी एक दूसरे से भयभीत हैं। उठते बैठते खाते-पीते जड़ जीव का भेद विज्ञान करो और कर्म सिद्धांत को मानते हुए यह संकल्प रहे यहां से हम महाविदेह में जाएंगे। ऐसी माता मिले जो भगवान के समवसरण में जाएं यह भाव संकल्प, प्रार्थना, आकांक्षा रहेगी तो जो चाहोगे वह निश्चित ही प्राप्त हो सकेगा।

प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने चातुर्मास पूर्णाहुति पर अवध संगरीला के श्रावक-श्राविकाओं सहित सभी के प्रति मंगल भावनाएं प्रेषित करते हुए ध्यान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान की।युवा मनीषी श्री शुभम मुनि जी म.सा., प्रवचन प्रभाकर श्री शमित मुनि जी म.सा., मधुर गायक श्री निशांत मुनि जी म.सा. व श्री शाश्वत मुनि जी म.सा. ने भजन एवं उद्बोधन दिया।
इस अवसर पर वैरागण बहन दीक्षा रवीन्द्र भंसाली जलगांव से आचार्य भगवन के दर्शनार्थ एवं दीक्षा आज्ञा हेतु उपस्थित हुई, उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त की। इस अवसर पर वैरागन बहन का अवधवासियों ने स्वागत सम्मान किया। ज्ञात रहे वैरागण बहन की दीक्षा दिनांक 22 फरवरी 2026 को पाचोरा, महाराष्ट्र में होनी सुनिश्चित हुई है। वैरागण बहन उपप्रवर्तिनी महासाध्वी श्री सुमनप्रभा जी म.सा. के सान्निध्य में संयम अंगीकार करने जा रही है।
चातुर्मास पूर्णाहुति पर श्री गौतम मेहता, श्री तुलसीभाई चपलोत, श्री रोहित जैन बोकड़िया, श्री सरदार बाबेल आदि ने अपनी भावनाएं व्यक्त की। श्रीमती मनीषा संचेती ने भजन के माध्यम से अपनी भावनाएं व्यक्त की।श्रीमती श्वेता मेहता के 78 एकासन पूर्ण होने पर शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउण्डेशन की ओर से स्मृति चिन्ह द्वारा सम्मानित किया




