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बाड़मेर जैन श्री संघ द्वारा ‘कृतज्ञता दिवस’ का भव्य आयोजन

आचार्य श्री जिनपियुषसागर सूरीश्वर जी म.सा. के चातुर्मास की पूर्णाहुति पर सूरत में भावनात्मक समारोह

सूरत। बाड़मेर जैन श्री संघ सर्वमंगलमय वर्षावास के तत्वावधान में दादावाड़ी पर्वत पाटिया, सूरत में परम पूज्य युग नायक, धर्मशिरोमणि, संयम सारथी, शासनप्रभावक खरत्तरगच्छाचार्य श्री जिनपियुषसागर सूरीश्वर जी म.सा. के चातुर्मास की पूर्णाहुति पर आज ‘कृतज्ञता दिवस’ का भव्य आयोजन किया गया। इस भावपूर्ण कार्यक्रम में सकल जैन समाज सहित जैनेतर समाज जनों ने भी बड़ी संख्या में उपस्थित होकर अपने अमूल्य अनुभव साझा किए और पूज्य गुरुदेव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

वक्ताओं ने कहा कि गुरुदेव की सरलता, सहजता और वीतरागी प्रवृत्ति ने सभी के हृदय में स्थान बनाया है। चार माह में गुरुदेव के प्रवचन, विशेष कक्षाओं एवं साधना द्वारा बच्चों, महिलाओं और समाज के हर वर्ग को धर्म एवं जैन तत्त्वदर्शन से जोड़ा गया। संघ ने व्यक्त किया कि विहार के पश्चात उनके बीच एक भावनात्मक रिक्तता रहेगी जो उनके गहरे आध्यात्मिक प्रभाव को दर्शाती है।

कार्यक्रम में महिला मंडल, केएमपी मंडल एवं महासंघ मंडल द्वारा गीतिकाएँ प्रस्तुत की गईं। भक्तों ने गुरु महिमा का गायन करते हुए चार माह की धार्मिक-साधना एवं शासन सेवा का गुणगान किया तथा ऐतिहासिक सूरत चातुर्मास को विशेष बताते हुए आचार्य श्री के त्याग, तप, आत्मानुशासन एवं दशकों से जारी राष्ट्रव्यापी शासनकार्य की चर्चा की। विशेष रूप से 25 वर्ष बाद आचार्य श्री और मुनिश्री सम्यकरत्नसागर जी के पृथक चातुर्मास को विशिष्ट त्याग का अद्वितीय प्रसंग बताया गया।

बाड़मेर जैन श्री संघ के वरिष्ठ सदस्य श्री चम्पालाल बोथरा ने बताया कि सूरत चातुर्मास के कारण संघ को राष्ट्रस्तर पर नई पहचान मिली। इस दौरान देशभर में अनेक प्रतिष्ठा, अंजनशलाका, शिलान्यास, दादावाड़ी प्रतिष्ठा, खनन मुहूर्त, कलश यात्रा एवं तीन मुमुक्षु दीक्षा जैसे पावन मुहूर्त प्रदान किए गए। सबसे महत्वपूर्ण, 871 वर्ष पुरानी प्रथम दादावाड़ी – अजमेर दादावाड़ी के जीर्णोद्धार का संपूर्ण मुहूर्त सूरत धरा से आचार्य श्री द्वारा प्रदान किया गया, जिसने संघ को ‘ब्रांड’ रूप में प्रतिष्ठित किया।

मुनिवृंद के सारगर्भित प्रवचनों में मुनिश्री समर्पित सागर जी ने “सद्गुरु कैसा हो” विषय पर उपदेश दिया। मुनिश्री शाश्वत सागर जी ने “अनासक्ति” एवं जीवन को “सगल” बनाने का संदेश दिया। बालमुनि श्री श्लोकरत्न सागर जी की सूक्ष्म साधना, मंत्रोच्चारण एवं भक्ति की सभी ने सराहना की।

अपने आशीर्वचन में पूज्य आचार्य श्री ने कहा कि उन्होंने और उनकी धवल सेना ने चार माह में धर्मप्रसार एवं आत्मकल्याण हेतु हर क्षण का उपयोग किया। उन्होंने सभी को इस पथ पर निरंतर आगे बढ़ने का आशीर्वाद दिया। साध्वी प्रमुखा श्रीजी ने भी धर्मप्रवाह में शामिल होकर आत्मकल्याण का आह्वान किया।
श्री बोथरा ने बताया कि आचार्य श्री एवं साध्वी प्रमुखा की प्रेरणा से 3 मुमुक्षु कन्याएँ संयम जीवन में प्रवेश करने जा रही हैं-1. मुमुक्षु कु. हर्षा कांकरिया-2. मुमुक्षु कु. सविता बोहरा-3. मुमुक्षु कु. मुस्कान सेठिया
दिनांक 5/11/2025 को मॉडल टाउन शांतिनाथ मंदिर बाड़मेर भवन से भव्य वरघोड़े के साथ मुमुक्षु बहिनें दादावाड़ी प्रवचन मंडप में पधारेंगी। वहां आचार्य श्री के श्रीमुख से उन्हें सर्वविरति मुहूर्त प्रदान किया जाएगा। सूरत, बाड़मेर, जोधपुर, पालनपुर, सांचौर, मालेगांव, चोहटन सहित अनेक नगरों से श्रद्धालु इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल होंगे।इसके उपरांत दोपहर 1 बजे आचार्य श्री का चातुर्मास स्थल परिवर्तन एवं शाम 4 बजे अमरोली की ओर विहार होगा।

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