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आनन्द शांति ज्ञान की कला है – आत्म ध्यान-आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा

11 केन्द्रों पर 1400 साधकों ने सीखा आत्म ध्यान

आत्म भवन, बलेश्वर, सूरत।ध्यान योगी आत्मज्ञानी सद्गुरुदेव आत्मानुशास्ता आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. के सान्निध्य में प्रातः 6.30 बजे से 9.30 बजे तक तीन घंटे का ऑनलाईन आत्म ध्यान धर्म यज्ञ का आयोजन किया गया।
आत्म ध्यान धर्म यज्ञ में साधकों को आचार्य श्री जी ने अपने मंगल उद्बोधन में फरमाया कि अपने आत्म स्वरूप के बोध को समझे बिना अनंत दुखों का सामना करना पड़ता है। आत्म बोध के अभाव में व्यर्थ की क्रियाओं में लगे रहने से दुःखों का अंत नहीं हो सकता है। आत्मा को आत्मा में स्थित करने की कला इस पंचम काल में हमें प्राप्त हुई है, जिसके द्वारा जड़ जीव का भेद कर आत्मा को आत्मा में स्थित करते हुए हम कर्म निर्जरा कर सकते हैं।


वीतराग साधिका निशाजी ने अरिहंत प्रभु की कृपा से प्राप्त अरिहंत वाणी द्वारा साधकों को स्वरूप के बोध की साधना करवाई। इस साधना के द्वारा सभी साधकों के अनादिकाल काल के मिथ्यात्व को क्षय करने की विधि सीखी और उनके अंतःकरण में सम्यक्त्व का बीज वपन किया।
वीतराग साधिका ने सत्य का बोध करवाया। व्यक्तित्व से पार अस्तित्व में रमणता की साधना बताई। जीव की वीतराग यात्रा प्रारंभ करवाते हुए फरमाया कि आत्मा का परिचय, आत्मा की समझ, आत्मा पर श्रद्धा और आत्मा में स्थिरता आवश्यक है। अंत में अनादिकाल के पापों का अवलोकन, आलोचना व प्रतिक्रमण करवाया।
प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने आत्म ध्यान की समझ प्रदान करते हुए योगासन एवं प्राणायाम के प्रयोग करवाए। साथ ही साधकों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।प्रारंभ में युवा मनीषी श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने प्रार्थना ध्यान करवाया।

यह आत्म ध्यान धर्म यज्ञ गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान सहित कुल 11 स्थानों पर एक-साथ एक समय पर आयोजित हुआ। (1) आनन्दधाम अहिल्या नगर महाराष्ट्र में 600, (2) जैन स्थानक सेक्टर-4 हिरणमगरी उदयपुर राजस्थान में 286, (3) महावीर प्रतिष्ठान पूणे महाराष्ट्र में 111, (4) जैन स्थानक किचलू नगर लुधियाना पंजाब में 99, (5) रविवार कारंजा जैन स्थानक नाशिक महाराष्ट्र में 97, (6) जैन स्थानक बिबवेवाड़ी पूणे महाराष्ट्र में 71, (7) वर्धमान प्रतिष्ठान शिवाजी नगर पूणे महाराष्ट्र में 60, (8) चिंचवड़ स्टेशन पूणे महाराष्ट्र में 30, (9) क्षेत्रपाल प्रतिष्ठान लोणीकन्द पूणे महाराष्ट्र में 30, (10) आत्म भवन, सूरत गुजरात में 30, (11) जैन स्थानक भटिण्डा पंजाब में 17, इस धर्म यज्ञ में कुल 1401 साधकों की सहभागिता रही, जिसमें साधु-साध्वी, श्रावक-श्राविकाएं सभी उपस्थित थे। आत्म ध्यान प्रशिक्षकों एवं सक्रिय धर्म सेवकों ने पुरुषार्थ कर उत्तम व्यवस्थाएं प्रदान की। जिन-जिन क्षेत्र के संघों ने आयोजन करवाया उन सभी का आचार्य श्री जी ने आशीर्वाद एवं कर्त्तज्ञता ज्ञापित करते हुए फरमाया कि इसी प्रकार आगे भी धर्म आराधना करते रहें। प्रतिदिन प्रातः 5 बजे का पारस चैनल पर आत्म ध्यान के प्रयोग आ रहे हैं उसका अवश्य लाभ लेंवें।
आनन्दधाम अहिल्या नगर में महाराष्ट्र प्रवर्तक श्री कुन्दनऋषि जी म.सा. के 92वें जन्मोत्सव पर विशेष धर्म यज्ञ के रूप में आयोजन किया गया। आचार्यश्री जी ने प्रवर्तक श्री जी के जन्मोत्सव पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं संप्रेषित की। ऑनलाईन आत्म ध्यान धर्म यज्ञ का प्रसारण आत्म भवन सूरत से वर्चुअल लाईव किया गया।

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