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धर्म का अर्थ सत्य,अहिंसा,मानवता और ईमानदारी-साध्वी प्रो.डॉ. मंगलप्रज्ञाजी

साम्प्रदायिक सद्भावना दिवस पर साध्वी श्री ने कहा दुनिया का कोई भी धर्म हिंसा व लड़ाई नही सिखाता

सूरत। अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमणजी द्वारा उद्घोषित अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतर्गत तीसरे दिन को अणुव्रत समिति ग्रेटर सूरत द्वारा ‘सांप्रदायिक सद्भावना दिवस’ के रूप में तेरापंथ भवन, सिटीलाइट में मनाया गया। इस अवसर पर साध्वी श्री प्रो. डॉ. मंगलप्रज्ञाजी की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों के आचार्य-धर्मगुरुओं ने एक मंच से मानवता, शांति और सद्भाव का संदेश दिया। प्रयागराज से सनातन धर्म के महंत श्री बालमुकुंदजी, ईसाई धर्मगुरु पादरी डेनिस एमिस, मुस्लिम धर्म के प्रतिनिधि श्री जे.सी. राज साहब, गुरु नानक गुरुद्वारा भटार के ग्रंथि जितेंद्रसिंहजी और ब्रह्माकुमारीज वेसू की संचालिका साधिका अवनीबेन ने उपयोगी विचार प्रस्तुत किए।

अपने संबोधन में साध्वी प्रो. डॉ. मंगलप्रज्ञाजी ने कहा कि धर्म और संप्रदाय दोनों अलग हैं, किंतु धर्म का स्वरूप सार्वभौमिक है। दुनिया का कोई भी धर्म हिंसा या लड़ाई नहीं सिखाता, बल्कि हर धर्म सत्य, अहिंसा, मानवता और ईमानदारी का उपदेश देता है। आचार्य तुलसी द्वारा प्रारंभ अणुव्रत आंदोलन का संदेश यही है कि यदि इंसान इंसानियत को न भूले तो हिंसा का स्थान ही नहीं रहेगा। साध्वी श्री डॉ. राजुल प्रभाजी ने कहा कि आत्महत्या, भ्रूण हत्या, भ्रष्टाचार और नशाखोरी जैसी समस्याओं के दौर में अणुव्रत ही आशा की किरण है।

महंत श्री बालमुकुंदजी ने कहा कि धर्म का उद्देश्य सुख-शांति प्रदान करना है और सात्विक आहार से ही सात्विक विचार व आचरण उत्पन्न होते हैं। पादरी डेनिस एमिस ने बाइबिल के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यक्ति का मूल्यांकन उसके आंतरिक गुणों से होना चाहिए। धर्म के नाम पर लड़ी जा रही लड़ाइयाँ धर्म का वास्तविक स्वरूप नहीं हैं। मुस्लिम प्रतिनिधि जे.सी. राज साहब ने कहा कि पैगम्बर मुहम्मद ने मानवता और समानता का संदेश दिया, किंतु आज धर्म के नाम पर झगड़े हो रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

ब्रह्माकुमारी अवनी बहन ने कहा कि ईश्वर एक है, उसके रूप अलग-अलग नामों में हैं। धर्म का वास्तविक स्वरूप प्रेम, करुणा और शांति है। ग्रंथि जितेंद्रसिंहजी ने गुरु नानक देवजी के संदेश का स्मरण कराते हुए कहा कि सच्चा धर्म वही है जिसमें सबकी भावनाओं का सम्मान और भाईचारा बढ़े।

कार्यक्रम का शुभारंभ अणुव्रत गीत से हुआ। अध्यक्ष श्री रतनजी भलावत ने स्वागत भाषण दिया, मंत्री श्री अनिलजी चोरडिया ने धन्यवाद ज्ञापित किया और संचालन प्रकल्प प्रभारी श्री अर्जुनजी मेड़तवाल ने किया। समिति की ओर से सभी धर्मगुरुओं का सम्मान किया गया।

 

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