देश की 54 निजी यूनिवर्सिटियां डिफॉल्टर घोषित, गुजरात की 8 भी शामिल

नई दिल्ली।यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने देशभर की 54 निजी विश्वविद्यालयों को डिफॉल्टर घोषित किया है। UGC एक्ट 1956 की धारा 13 के तहत अनिवार्य जानकारी समय पर जमा नहीं कराने और वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराने के चलते यह कार्रवाई की गई है। इसमें सबसे अधिक 10 विश्वविद्यालय मध्यप्रदेश के हैं, जबकि गुजरात की 8, सिक्किम की 5 और उत्तराखंड की 4 यूनिवर्सिटियां शामिल हैं।
UGC ने सूची जारी कर संबंधित विश्वविद्यालयों को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की चेतावनी दी है। आयोग के अनुसार ईमेल और ऑनलाइन मीटिंग्स के माध्यम से कई बार रिमाइंडर दिए गए, लेकिन इसके बावजूद विश्वविद्यालयों ने न तो निरीक्षण हेतु जरूरी जानकारी सौंपी और न ही रजिस्टार द्वारा प्रमाणित सहायक दस्तावेज जमा कराए।
UGC सचिव मनीष जोशी ने बताया कि विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया गया था कि वे अपनी वेबसाइट के होमपेज पर एक लिंक देकर भरे गए फॉर्म और परिशिष्ट अपलोड करें, ताकि जानकारी छात्रों और आम जनता के लिए सुलभ हो। मार्गदर्शिका के मुताबिक उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए कार्यशील वेबसाइट बनाए रखना और उस पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
गुजरात की यूनिवर्सिटियां (8)
गांधीनगर यूनिवर्सिटी, जे.जे. यूनिवर्सिटी, के.एन. यूनिवर्सिटी, एम.के. यूनिवर्सिटी, प्लास्टइंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, सुरेन्द्रनगर यूनिवर्सिटी, टीमलीज स्किल्स यूनिवर्सिटी, ट्रांसस्टेडिया यूनिवर्सिटी।
सिक्किम की यूनिवर्सिटियां (5)
मेधावी स्किल्स यूनिवर्सिटी, सिक्किम अल्पाइन यूनिवर्सिटी, सिक्किम ग्लोबल टेक्निकल यूनिवर्सिटी, सिक्किम इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, सिक्किम स्किल्स यूनिवर्सिटी।
उत्तराखंड की यूनिवर्सिटियां (4)
माया देवी यूनिवर्सिटी, माइंड पावर यूनिवर्सिटी, श्रीमती मंजिरा देवी यूनिवर्सिटी, सूरजमल यूनिवर्सिटी।
मध्यप्रदेश की यूनिवर्सिटियां (10)
अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी (मप्र), आर्यावर्त यूनिवर्सिटी (सीहोर), डॉ. प्रीति ग्लोबल यूनिवर्सिटी (शिवपुरी), ज्ञानवीर यूनिवर्सिटी (सागर), जेएनसीटी प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (भोपाल), एलएनसीटी विद्यापीठ यूनिवर्सिटी (इंदौर), महाकौशल यूनिवर्सिटी (जबलपुर), महर्षि महेश योगी वैदिक यूनिवर्सिटी (जबलपुर), मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी (सीहोर), शुभम यूनिवर्सिटी (भोपाल)।
इसके अलावा असम, गोवा, हरियाणा, कर्नाटक, पंजाब, राजस्थान, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में भी एक-एक विश्वविद्यालय को डिफॉल्टर सूची में शामिल किया गया है।



