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सास-बहू के रिस्तों में परिवारिक मर्यादा खुशहाली का मजबूत आधार*: *शाश्वत सागर जी

बाड़मेर जैन श्री संघ द्वारा सूरत के पर्वत पाटिया स्थित कुशल दर्शन दादावाड़ी में आयोजित सर्वमंगलमय वर्षावास के दौरान एक विशेष सास-बहू अधिवेशन का आयोजन किया गया। संयम सारथी ,खरतरगच्छाचार्य श्री जिन पियूष सागर सूरीश्वर जी म.सा. की पावन प्रेरणा से उनके शिष्य मुनिवर श्री साश्वत सागर जी म.सा. ने इस अधिवेशन को संबोधित करते हुए परिवारिक मर्यादा और संबंधों पर महत्वपूर्ण संदेश दिए।
मुनि श्री ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि सास और बहू का संबंध परिवार का सबसे संवेदनशील लेकिन मजबूत आधार है। उन्होंने इस रिश्ते को मजबूत बनाने का सूत्र बताते हुए कहा कि यदि सास, बहू को बेटी मानकर स्नेह दे और बहू, सास को माँ मानकर सेवा और आदर करे, तो घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि घर की छोटी-बड़ी बातों को बाहर या मायके में बताना गृहस्थ धर्म के विपरीत है। परिवार की मर्यादा और विश्वास घर के भीतर ही सुरक्षित रहना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि बहू जब मायके जाए और केवल ससुराल की खुशहाली व अच्छे संस्कारों का वर्णन करे, तो उसका मान और भी बढ़ता है।
मुनि श्री ने उपस्थित सास-बहुओं को यह संदेश दिया कि वे एक-दूसरे की विरोधिनी नहीं, बल्कि सहयोगिनी हैं। उन्होंने कहा कि परिवार में मिलजुलकर रहना ही सच्चा धर्म है और घर की मर्यादा बनाए रखना ही गृहस्थ का सबसे बड़ा आभूषण है। इस प्रेरक संदेश का सभा में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने स्वागत किया और अपने घरों में प्यार, सम्मान और मर्यादा को बनाए रखने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के समापन पर वरिष्ठ समाजसेवी श्री चंपालाल बोथरा ने बताया की “सास-बहू अधिवेशन केवल प्रवचन नहीं, बल्कि परिवारिक जीवन के लिए एक मार्गदर्शक है। यदि हम सब इस संदेश को अपने घरों में उतार लें, तो न केवल हमारा घर, बल्कि पूरा समाज प्रेम, शांति और मर्यादा से आलोकित हो सकता है।

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