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नारी अगर शक्ति है तो पुरुष सहनशक्ति है : पं. विजय शंकर मेहता

सूरत। गृ‍हस्थ जीवन में एक छत के नीचे रहकर घर की प्रतिपल चुनौतियों का सामना करना भी तप है। यह विचार पंडित विजय शंकर मेहता ने सिटीलाइट स्थित महेश्वरी भवन में श्री माहेश्वरी महिला मंडल द्वारा आयोजित शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन व्यासपीठ से व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि संस्कार निर्माण में मंत्रों का विशेष महत्व है। संसार में परमात्मा का एक रूप मंत्र भी है। जिस जीभ से हम भगवत स्मरण करते हैं, उसी से कटु वाणी का प्रयोग नहीं होना चाहिए, क्योंकि किसी भी मंत्र का प्रत्येक शब्द अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। परिवार में हर सदस्य को बोलने का अवसर मिलना चाहिए। सनातन संस्कृति में शब्द को ही ब्रह्म कहा गया है।

पं. मेहता ने आगे कहा कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी बिना शक्ति के सृष्टि संचालन नहीं कर सकते। नारी यदि शक्ति है तो पुरुष सहनशक्ति है और दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।कथा में कामदेव संध्या प्रसंग, शिव-सती दाम्पत्य और शिव-पार्वती विवाह आदि प्रसंगों का भी वर्णन किया गया। आगामी मंगलवार को कथा में कोटिरुद्र संहिता और बारह ज्योतिर्लिंगों के प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा।

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