
सूरत। दक्षिण गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (चैंबर) अध्यक्ष निखिल मद्रासी ने कहा कि जीवन आवश्यक वस्तुओं एवं हेल्थ व लाइफ इंश्योरेंस पर जीएसटी समाप्त करने का निर्णय सराहनीय है। चैंबर लंबे समय से इस दिशा में प्रयासरत था और 3 सितंबर को हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में इन मांगों को मान्यता मिली। साथ ही प्रिंटिंग सर्विसेज, स्नैक आइटम, सीईटीपी प्लांट सर्विसेज, होटल रूम किराया (7500 रुपए तक), 1200 सीसी से नीचे की कार, सीमेंट, विभिन्न कंस्ट्रक्शन आइटम, एयर कंडीशनर, एलसीडी टीवी और सोलर पैनल पर भी टैक्स दरों में कमी की गई है, जिससे आम उपभोक्ता को सीधे राहत मिलेगी।
हालाँकि, चैंबर ने वस्त्र उद्योग को लेकर चिंता जताई है। अध्यक्ष मद्रासी ने कहा कि यार्न पर जीएसटी दर 12% से घटाकर 5% कर दी गई है, जबकि उसके मुख्य इनपुट जैसे MEG, PTA और चिप्स पर कर 18% यथावत है। इससे यार्न निर्माताओं को आईटीसी लॉस बढ़ेगा और नकदी प्रवाह पर दबाव पड़ेगा। उपाध्यक्ष अशोक जिरावला ने बताया कि पहले फैब्रिक पर 12% इनपुट और 5% आउटपुट होने से 2–2.5% तक रिफंड मिलता था, जो अब बंद हो गया है। परिणामस्वरूप सूरत के वस्त्र उद्योग, जहाँ भुगतान चक्र 90–120 दिनों का है, को हर माह जीएसटी चुकाने हेतु लगभग 20% अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की आवश्यकता होगी, जिससे उद्योग विस्तार की गति धीमी पड़ सकती है।
चैंबर ने सरकार से आग्रह किया है कि यार्न पर 18% और फैब्रिक पर 5% जीएसटी की व्यवस्था की जाए, जिससे पूरी एमएमएफ वैल्यू चेन पर कर संरचना संतुलित रहे। साथ ही चैंबर ने यह भी कहा कि व्यापक कर कटौती से एमएसएमई, महिलाओं और युवाओं का Ease of Living बेहतर होगा तथा उपभोक्ताओं पर कर का बोझ घटेगा।




