जैनों का महापर्व पर्युषण पर्वत पाटिया तेरापंथ सभा भवन में सानंद संपन्न

सूरत।युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की आज्ञा से पर्वत पाटिया स्थित तेरापंथ सभा भवन में 20 सितम्बर से अष्ट दिवसीय पर्युषण पर्व का शुभारंभ उपासक श्री गणपतलाल मारू एवं उपासक श्री दिनेश बाफना की उपस्थिति में हुआ।
पर्व के प्रथम दिवस को खाद्य संयम दिवस के रूप में मनाया गया, जिसमें महिला मंडल की बहनों ने द्रव्य पचरंगी की साधना की तथा 1 से 11 तक द्रव्यों की सीमा का पालन किया। दूसरे दिन स्वाध्याय दिवस रखा गया, जिसमें बहनों ने 4 से 5 घंटे तक स्वाध्याय कर आत्मनिर्जरा की। इसके बाद सामायिक दिवस मनाया गया, जिसमें अभातेयुप द्वारा निर्देशित अभिनव सामायिक का प्रयोग उपासकों ने करवाया। इस दिन 150 सामायिक संपन्न हुए।
“मीठी बोली ही वाणी संयम है” इस संदेश को आत्मसात करते हुए 38 बहनों ने 1 से 10 घंटे तक की मौन साधना की। अणुव्रत चेतना दिवस पर आचार्य तुलसी के अवदान को स्वीकारते हुए बहनों ने छोटे-छोटे संकल्पों का त्याग एक माह से लेकर एक वर्ष तक की अवधि के लिए किया।
जप दिवस पर 24 घंटे लगातार 5 दिन तक नमस्कार महामंत्र का अखंड जप हुआ। इसमें बहनों ने सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक, सभा ने शाम 7 बजे से रात 11 बजे तक तथा युवक परिषद ने रात 11 बजे से सुबह 7 बजे तक अपनी सहभागिता निभाई। ध्यान दिवस पर उपासक श्री गणपतलाल मारू ने ध्यान साधना का प्रयोग करवा कर आत्मसाक्षात्कार कराने का प्रयास किया।

पर्युषण के दौरान प्रतिदिन 140 से 150 प्रतिक्रमण संपन्न हुए। भगवती संवत्सरी दिवस पर उपवास एवं पोषध द्वारा आत्मा को निर्मल बनाने का संकल्प लिया गया। इस दिन अष्ट प्रहरी और चार प्रहरी मिलाकर लगभग 80 पोषध साधनाएँ हुईं। संवत्सरी के अवसर पर खमतखामणा कर सभी ने एक-दूसरे से क्षमा याचना की।
सभा अध्यक्ष गौतम ढेलडिया, मंत्री प्रदीप गंग, संगठन मंत्री पवनकुमार बुच्चा तथा ज्ञानशाला की सह मुख्य प्रशिक्षिका सुमित्रा श्यामसुखा ने गुरुदेव के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की और दोनों उपासकजनों का आभार व्यक्त करते हुए संपूर्ण श्रावक समाज से सामूहिक खमतखामणा की।पर्वत पाटिया में आयोजित यह अष्ट दिवसीय पर्युषण पर्व श्रद्धा और उल्लासपूर्वक सानंद संपन्न हुआ।




