धर्म का मूल विनय है, धर्म का सार क्षमा है-आचार्य डॉ.शिवमुनि
पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व क्षमापना के साथ सम्पन्न

अवध संगरीला, बलेश्वर, सूरत।आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. ने प्रातः 8 बजे सभी को सामूहिक मंगल पाठ के साथ उद्बोधन में फरमाया कि आज क्षमापना का दिन हम सभी के लिए महत्त्वपूर्ण है। संवत्सरी प्रतिक्रमण के पश्चात् मैं अरिहंत परमात्मा श्री सीमंधर स्वामी भगवान, परम उपकारी जिनशासन देव से विशेष रूप से क्षमा याचना करता हूं। धर्म का मूल विनय है, धर्म का सार क्षमा है। मिथ्यात्व, अव्रत, प्रमाद, कषाय, अशुभ योग से बंधे कर्मों को क्षय करने के लिए मैं जीवात्मा अपने स्वभाव में रहते हुए। अभेद दृष्टि से प्रत्येक जीव से अन्तःकरण की साक्षी से क्षमा प्रार्थी हूं।
क्षमापना – जैन शासन के चारों सम्प्रदाय के विशेष प्रमुख आचार्य भगवन जिसमें श्वेताम्बर मूर्तिपूजक परम्परा के गच्छाधिपति आचार्य श्री अभयदेव सूरीजी,गच्छाधिपति आचार्य श्री नित्यानन्द सूरीजी, खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री मणिप्रभ सागर जी, तेरांपथ के आचार्य श्री महाश्रमण जी, दिगम्बर परम्परा आचार्य श्री समयसागर जी एवं स्थानकवासी परम्परा के अनेक समुदाय के समुदाय प्रमुख एवं आचार्य भगवंतों एवं समग्र साधु-साध्वीवृंद से हार्दिक क्षमायाचना। श्रमण संघ के 366 चातुर्मास में विराजित समस्त पदाधिकारी एवं लगभग 1200 साधु-साध्वीवृंद से हार्दिक क्षमायाचना। श्रमण संघीय प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने चतुर्विध संघ एवं चारों समुदाय के समस्त साधु-साध्वीवृन्द श्रावक-श्राविकाओं से क्षमा याचना की।
पर्युषण पर्व के दिनों में प्रतिदिन आचार्य भगवन का दैनिक मंगल उद्बोधन श्रवण करने का लाभ प्राप्त किया, वहीं युवामनिषी श्री शुभम मुनि जी म.सा. एवं प्रवचन प्रभाकर श्री शमित मुनि जी म.सा. द्वारा श्री अंतकृत दंशाग सूत्र का मूल एवं व्याख्या की गई। प्रातः 7 बजे से प्रतिदिन अरिहंत आराधिका निशाजी के द्वारा अरिहंत प्रभु की वाणी शुक्ल ध्यान के प्रयोग करवाये गये।
पर्युषण पर्व के अंतर्गत दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, जम्मू एवं कनाडा आदि देश-विदेश से आए श्रावक-श्राविकाओं ने पर्युषण पर्व पर आठ दिन अवध संगरीला में रहकर विशेष धर्माराधना सम्पन्न की। आत्म भवन में आठ दिनों तक प्रतिदिन नवकार महामंत्र का जाप हुआ। इस पर्व के दौरान अनेक श्रावक-श्राविकों ने उपवास, एकासन,आयंबिल मासखमण आदि बड़ी तपस्याएं की।
गुरुवारको प्रातः 7 बजे क्षमापना दिवस पर आत्म भवन में प्रातः 7 से 8 बजे शुक्ल ध्यान का प्रयोग करवाया गया। तत्पश्चात् उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से गत वर्ष की भूलों के लिए अंतःकरण से क्षमायाचना की एवं एक दूसरे से क्षमा याचना कर स्वयं को हल्का किया।
इस अवसर पर शिवाचार्य श्री ने फरमाया कि आने वाले वर्ष भर में देह से अलग जीवात्मा का अनुभव करते हुए, शरीर और आत्मा का भेद करते हुए जीव में स्थित रहने का प्रयत्न करना है। स्वयं कोे आत्मार्थी बनने की ओर कदम बढ़ाना है तभी इस जीव का कल्याण होगा।
शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउण्डेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवीन्द्रनाथ जैन एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक मेहता, तुलसीभाई चपलोत ने सभी से क्षमा याचना करते हुए बाहर से आए हुए अतिथियों एवं दान-दाताओं के प्रति हार्दिक कृतज्ञता ज्ञापित की।
स्थानीय एवं बाहर से आए हुए सभी अतिथियों के लिए पारणे की व्यवस्था शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउण्डेशन की ओर से संचालित भोजनशाला में की गई।
क्षमायाचना मंगल संदेश यू-ट्यूब के माध्यम से प्रसारित किया, जिसके माध्यम देश-विदेश में बैठें श्रद्धालुओं ने मंगल पाठ एवं क्षमायाचना संदेश श्रवण कर अपने आपको धन्य महसूस किया।




