
सूरत। दि सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा बुधवार 17 सितंबर को सरसाणा स्थित संहति में जीएसटी 2.0 में किए गए सुधारों पर एक मार्गदर्शन सत्र आयोजित किया गया। इस अवसर पर सीए नितेश जैन, सीए रश्मिन वाजा और सीए पुनीत प्रजापति ने उद्योग, व्यापार और उपभोक्ताओं पर इन सुधारों के प्रभाव की विस्तृत जानकारी दी।
चैंबर अध्यक्ष निखिल मद्रासी ने कहा कि जीएसटी 1.0 भारतीय अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार था और अब जीएसटी 2.0 उद्योगों को अधिक पारदर्शिता, सरलता और कार्यकुशलता की ओर ले जाएगा। उन्होंने कहा कि बड़े उद्योगों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने और लघु उद्योगों को मजबूती देने में ये बदलाव उपयोगी सिद्ध होंगे।
चार्टर्ड एकाउंटेंट विशेषज्ञों ने बताया कि अब जीएसटी तीन दरों – 5%, 18% और 40% में रहेगा। आवश्यक वस्तुओं पर पाँच प्रतिशत, सामान्य वस्तुओं और सेवाओं पर 18 प्रतिशत और लग्जरी वस्तुओं पर 40 प्रतिशत जीएसटी लागू होगा। इससे आवश्यक वस्तुएँ सस्ती होंगी। कृषि और हस्तकला क्षेत्र में ट्रैक्टर व खाद पर पाँच प्रतिशत की दर रखी गई है। स्वास्थ्य और बीमा क्षेत्र पर भी बड़ा बोझ घटेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पुराने स्टॉक पर छपे एमआरपी को बदलना जरूरी नहीं होगा, केवल रीलैबलिंग करनी होगी और दरों में कमी का सीधा लाभ ग्राहकों तक पहुँचाना अनिवार्य रहेगा। व्यापारियों को राहत देते हुए अब दो करोड़ तक की टर्नओवर वाले व्यापारियों को रिटर्न फाइल करने से छूट दी गई है। नए व्यापारियों को तीन दिन में जीएसटी रजिस्ट्रेशन मिल जाएगा।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि कई उत्पादों पर सेस हटाया गया है, लेकिन पुराने स्टॉक पर भरे गए सेस के आईटीसी और टेक्सटाइल–फुटवियर उद्योग को लेकर अभी स्पष्टता आना बाकी है। टेक्सटाइल और फुटवियर सेक्टर में इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की समस्या बनी हुई है।
सत्र में उद्योगपति, व्यापारी, सीए प्रोफेशनल्स और छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन जीएसटी कमेटी चेयरमैन मुकुंद चौहान ने किया और आभार सीए शैलेश लाखनकिया ने व्यक्त किया।




