
सूरत। कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की टेक्सटाइल गारमेंट कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन चंपालाल बोथरा ने आगामी जीएसटी काउंसिल की बैठक में कपड़ा उद्योग के लिए तत्काल सुधार लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
बोथरा ने कहा कि भारत का टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग देश की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान की रीढ़ है। यह क्षेत्र करोड़ों लोगों, विशेषकर MSME, असंगठित क्षेत्र, महिला कारीगरों और उद्यमियों को रोजगार देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 5F विजन (Farm → Fibre → Factory → Fashion → Foreign) दूरदर्शी पहल है, लेकिन इसे सफल बनाने के लिए जीएसटी प्रणाली की विसंगतियों को दूर करना जरूरी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद तक एक समान 5% जीएसटी लागू किया जाना चाहिए। वर्तमान में गारमेंट पर अलग-अलग दरें और ₹1000 की सीमा छोटे व्यापारियों और MSME के लिए कठिनाइयाँ उत्पन्न कर रही हैं। इसलिए इस सीमा को बढ़ाकर ₹10,000 किया जाए। इससे न केवल व्यापारियों को राहत मिलेगी बल्कि उपभोक्ताओं को भी कपड़े किफायती दामों पर मिल सकेंगे।
लेहंगा और सेमी-स्टिच्ड आइटम्स पर 1000 रुपये तक 5% और उससे ऊपर 12% जीएसटी को अनुचित बताते हुए बोथरा ने कहा कि ये वस्त्र पहनने के लिए तैयार नहीं होते, इसलिए इन्हें फैब्रिक की श्रेणी में रखा जाए और इन पर भी 5% जीएसटी ही लागू होना चाहिए। इससे लाखों कारीगरों और छोटे दुकानदारों को सीधा लाभ मिलेगा।
उन्होंने 100% एफडीआई और ऑनलाइन व्यापार के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विदेशी ब्रांडों और बड़े ग्रुपों को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे छोटे व्यापारी और MSME अस्तित्व की चुनौती से जूझ रहे हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए सरकार को नीति सुधार करने होंगे।
अनियंत्रित छूट और डिस्काउंटिंग को स्थानीय बाजार के लिए हानिकारक बताते हुए बोथरा ने कहा कि सरकार को इस पर नियंत्रण करना चाहिए ताकि स्वस्थ और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा कायम रह सके। उनके अनुसार, जीएसटी सुधार केवल कर नीति का विषय नहीं बल्कि उद्योग के भविष्य, रोजगार और देश की आर्थिक प्रगति से जुड़ा हुआ है।
बोथरा ने बताया कि इस संदर्भ में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह, गुजरात के वित्त मंत्री कनुभाई देसाई तथा सांसद एवं कैट राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल को पत्र भेजे गए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार करेगी और टेक्सटाइल उद्योग को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी।




