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1 दिवसीय ऑनलाईन आत्म ध्यान धर्म यज्ञ ,12 केन्द्रों पर 750 साधकों ने सीखा आत्म ध्यान

आत्म भवन, बलेश्वर, सूरत।ध्यान गुरु आत्मज्ञानी सद्गुरुदेव आत्मानुशास्ता आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. के सान्निध्य में प्रातः 7 बजे से 10 बजे तक तीन घंटे का ऑनलाईन आत्म ध्यान धर्म यज्ञ का आयोजन सूरत आत्म भवन से किया गया।
ऑनलाईन आत्म ध्यान धर्म यज्ञ में साधकों को आचार्य श्री जी ने आत्म ध्यान का प्रयोग करवाते हुए फरमाया कि चेतना का स्वभाव है स्व में अर्थात आत्मा में रमण करना। अपनी आत्मा को जाने और उसमें गहराई से डूबने का प्रयास करें। जिससे अनंत सुख, शांति का अनुभव प्राप्त किया जा सकता है।


अरिहंत प्रभु की कृपा से प्राप्त अरिहंत वाणी द्वारा साधकों को स्वरूप के बोध की साधना करवाई। इस साधना के द्वारा सभी साधकों के अनादिकाल के मिथ्यात्व को क्षय करने की विधि सीखी और उनके अंतःकरण में सम्यक्त्व का बीज वपन किया।
अरिहंत वाणी में सत्य का बोध करवाया गया। व्यक्तित्व से पार अस्तित्व में रमणता की साधना बताई। जीव की वीतराग यात्रा प्रारंभ करवाते हुए फरमाया कि आत्मा का परिचय, आत्मा की समझ, आत्मा पर श्रद्धा और आत्मा में स्थिरता आवश्यक है। अंत में अनादिकाल के पापों का अवलोकन, आलोचना व प्रतिक्रमण करवाया।


प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनिजी ने फरमाया कि सौ प्रतिशत बीमारियों का कारण है मन का दुःषचिंतन। व्यक्ति का मन के स्तर पर सक्रिय रहना। मनुष्य का मन सबसे ज्यादा सक्रिय होता है, व्यक्ति को जब अपने स्वरूप का बोध हो जाता है तो वह मन के पार आत्मा में स्थित रहने की कला एवं स्वरूप के बोध की विधि इस आत्म ध्यान धर्म यज्ञ में सिखाई गई।
प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने आत्म ध्यान की समझ प्रदान करते हुए हमेशा युवा रहते हुए शरीर को स्वस्थ रखने की कला योगासन एवं प्राणायाम के प्रयोग करवाए। साथ ही साधकों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।प्रारंभ में युवा मनीषी श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने प्रार्थना ध्यान करवाया।


यह आत्म ध्यान धर्म यज्ञ गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचलप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ सहित कुल 12 स्थानों पर आयोजित हुआ। (1) सिविल लाईन्स, लुधियाना, पंजाब में 185, (2) केशव नगर उदयपुर, राजस्थान में 100, (3) सेक्टर 18 डी, चण्डीगढ़ में 90, (4) अरिहंत नगर, दिल्ली में 66, (5) संगमनेर महाराष्ट्र में 65, (6) अम्बाला, हरियाणा में 60, (7) भटिण्डा, पंजाब में 50, (8) वर्धमान प्रतिष्ठान शिवाजी नगर पूणे महाराष्ट्र में 47, (9) आत्म भवन सूरत में 25 (10) सोलन हिमाचलप्रदेश में 24, (11) रायपुर, छत्तीसगढ़ में 22, (12) केडगांव, अहिल्या नगर, महाराष्ट्र में आदि जगहों से इस धर्म यज्ञ में कुल 739 साधकों की सहभागिता रही, जिसमें साधु-साध्वी, श्रावक-श्राविकाएं सभी उपस्थित थे। आत्म ध्यान प्रशिक्षकों एवं सक्रिय धर्म सेवकों ने पुरुषार्थ कर उत्तम व्यवस्थाएं प्रदान की। जिन-जिन क्षेत्र के संघों ने आयोजन करवाया उन सभी का आचार्य श्री जी ने आशीर्वाद एवं कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए फरमाया कि इसी प्रकार आगे भी धर्म आराधना करते रहें।ज्ञातव्य रहे कि आगामी 21 दिसम्बर 2025 को अन्तर्राष्ट्रीय ध्यान दिवस पर प्रातः 9 से 12 बजे तक आत्म ध्यान धर्म यज्ञ का आयोजन होगा।

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