अहमदबादसामाजिक/ धार्मिकसूरत सिटी

श्रावकों में बनी रहे धर्म की भावना : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण

-श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य के श्रीचरणों में अर्पित की भावांजलि,दायित्व हस्तांतरण का भी रहा उपक्रम

 -चतुर्मासकाल के अंतिम दिन आचार्यश्री ने राजा प्रदेशी व कुमार श्रमण  केशी की कथा का किया वर्णन

05.11.2025, बुधवार, कोबा, गांधीनगर (गुजरात) :गुजरात की धरती पर दूसरे चतुर्मास का अंतिम दिवस। आस्था, भक्ति, भावना, भावुकता, श्रद्धा-भक्ति का उमड़ता ज्वार। चार महीनों तक अपने आराध्य की आराधना, उपासना व सेवा में जुटे श्रद्धालु विदाई की बेला में मानों भावनाओं के ज्वार में बहे चले जा रहे हैं। श्रद्धालुओं के भावनाओं के ज्वार में मानों चतुर्मास स्थल परिसर डूबता जा रहा है। बुधवार को अहमदाबादवासी श्रद्धालुओं की ओर से बुधवार को भी मंगलभावना समारोह समायोजित हुआ।

बुधवार को वर्ष 2025 के चतुर्मास स्थल प्रेक्षा विश्व भारती परिसर में बने ‘वीर भिक्षु समवसरण’ से आज आचार्यश्री भिक्षु के परंपर पट्टधर, अखण्ड परिव्राजक, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी इस चतुर्मास का अंतिम मंगल पाथेय प्रदान करने के लिए पधारे तो पूरा वातावरण श्रद्धालुओं के जयघोष गुंजायमान हो उठा। आचार्यश्री के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ पुनः प्रारम्भ हुआ मंगलभावना समारोह का आयोजन। इस क्रम में डॉ. अनिल जैन, चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के विरष्ठ उपाध्यक्ष श्री रायचन्द लुणिया, डॉ. धीरजचन्द मरोठी, स्वागताध्यक्ष श्री भैरुलाल चौपड़ा, श्री गौतम बाफना, डॉ. धवल दोसी व डॉ. कल्पना जैन ने अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ कन्या मण्डल-अहमदाबाद ने अपनी प्रस्तुति दी।

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने समुपस्थित श्रद्धालु जनता को अपनी अमृतवाणी से रसपान कराते हुए राजा प्रदेशी व मुनि कुमारश्रमणकेशी के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि राजा प्रदेशी नास्तिक विचारधारा का राजा था। एक मुनि कुमारश्रमणकेशी उसके राज्य के उद्यान में आते हैं और संयोगवश वहां पहुंचा और इस प्रकार राजा प्रदेशी व मुनि कुमारश्रमणकेशी के मध्य मानों शास्त्रार्थ प्रारम्भ हो गया। मुनि कुमारश्रमणकेशी ने कहा कि हमारा सिद्धांत है कि आत्मा अमर है। मृत्यु के बाद भी आत्मा का नाश होता है। राजा ने कहा कि मैं इसे नहीं मानता। आत्मा और शरीर एक ही है। शरीर की मृत्यु हो जाए तो आत्मा का क्या काम है। मुनि कुमारश्रमणकेशी ने कहा कि नहीं हमारा सिद्धांत है आत्मा और शरीर पृथक्-पृथक् है। मृत्यु के बाद आत्मा का पुनर्जन्म होता है। आत्मा अमर है और शरीर नश्वर है। मुनि कुमारश्रेणी के तर्कों से राजा प्रदेशी ने समझी और अपनी नास्तिक विचारधारा का परित्याग कर आस्तिक बन गया। मुनि कुमारश्रमणकेशी ने उसे श्रमणोपासक बना दिया और बारह व्रत दिला दिया।

इस कथा के माध्यम से आचार्यश्री ने समुपस्थित जनता को पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि अब हमें विहार करना है। आप सभी इस कथा से प्रेरणा लें कि इन चार महीनों में जो भी नियम, व्रत, संयम आदि स्वीकार किए हों, उसका सजगता से पालन करने का प्रयास करना चाहिए। रमणीय बनकर अरमणीय नहीं बनना। अहमदाबाद की जनता धर्म की दृष्टि से रमणीय बनी रहे। जहां तक संभव जीवन में धर्म का प्रभाव बना रहे। वर्तमान में आचार्यश्री भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष चल रहा है। यह चतुर्मास काल अब सम्पन्न हो रहा है। आगे विहार करना है। सभी श्रावकों में धर्म की भावना बनी रहे।

मंगलभावना समारोह के दूसरे चरण में श्री आनंद दुगड़, श्री आनंद संचेती, श्री पंकज बोथरा, श्री अनिल कोठारी, श्री मनोज लुणिया, श्री सुरेश दक, कोषाध्यक्ष श्री नरेन्द्र सुरणा, मंत्री श्री विजयराज सुराणा, श्री सोहन भरसारिया, श्री झूमर दुगड़, श्री अभिषेक भंसाली, श्रीमती शीला चौपड़ा व श्री नरेश सालेचा ने अपनी अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ युवक परिषद-उत्तर अहमदाबाद के सदस्यों ने गीत को प्रस्तुति दी। मंगलभावना समारोह का संचालन चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के महामंत्री श्री अरुण बैद ने किया।

जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष श्री मनसुखलाल सेठिया ने सम्पूर्ण चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति को बधाई देते हुए छोटी खाटू में आयोजित होने वाले मर्यादा महोत्सव में उपस्थित होने के लिए श्रावक समाज को आमंत्रित किया। इसके साथ ही कार्यक्रम में ध्वज हस्तातंरण के साथ दायित्व हस्तांतरण का उपक्रम भी रहा। इस संदर्भ में चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री अरिवंद संचेती ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। मेवाड़ कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष श्री राजकुमार फत्तावत ने भी अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी। चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के सदस्यों ने मेवाड़ कॉन्फ्रेंस के सदस्यों को जैन ध्वज हस्तांतरित किया गया। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में मंगलपाठ सुनाते मंगल प्रेरणा भी प्रदान की।

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