जीवन चक्र में जैसा करोंगे वैसा लौटके आएगा-मुनि श्रेयांसप्रभसागर
जीयो और जीने दो-मुनि श्रेयांसप्रभसागर

बाड़़मेर 26 सितम्बर। कोटड़िया-नाहटा ग्राउण्ड स्थित सुधर्मा प्रवचन वाटिका में श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ चातुर्मास कमेटी के तत्वाधान एवं खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्रीजिनमणिप्रभसूरीश्वर म.सा. की पावन निश्रा व बहिन म.सा. साध्वी डाॅ. विधुत्प्रभाश्री व श्रमण-श्रमणीवृन्द के पावन सानिध्य में चल रहे संघ शास्ता वर्षावास 2025 के दौरान शुक्रवार को मुनिराज मुखरप्रभसागरजी म.सा. ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि भगवान महावीर ने जीयो और जीने दो,अहिंसा परमों धर्म का सिद्धात इसलिए दिया कि जीव चाहे छोटा हो या बड़ा,बोल सकता हो या मूक हो दर्द सभी को होता है। जिस तरह इतने बडे शरीर में केवल पीन चुभने से दर्द होता है तो आप किसी प्राणी को कैसे मार सकते है। सुक्षम जीव को भी वैसे ही दर्द होता है जैसे हमें महसुस होता है। कर्म जैसे होंगे वैसे ही भोगने पडेगे ये वो चक्र है जो धूमकर वापस आएगा ही। कर्म किसी को नही छोड़ता वो चाहे चींटी हो या इन्सान। स्वयं जिस तरह जीना चाहते है ठीक वैसे ही वो सबके साथ सोच रखें तभी सभी का जीवन सुखमय होगा। मुनिश्री ने कई वृतात सुनाते हुए कहा कि जैन धर्म में आप साधु जीवन को देखिए वो बैठने पहले भी उस जगह को ऊनी वस्त्र से साफ करते है ताकि अन्जाने में भी किसी जीव को कष्ट ना हो। चातुर्मास कमेटी के उपाध्यक्ष ओमप्रकाश भंसाली व मीडिया संयोजक कपिल मालू ने बताया कि गुरूवार को प्रवचन माला के शुभारम्भ में संगीतकार मूलचन्द मालू व गुरूभक्तों द्वारा सामुहिक गुरूवन्दन कर मुनिराज मुखरप्रभसागरजी म.सा. द्वारा प्रार्थना भजन के साथ हुआ। शुक्रवार को आयंबिल की तपस्या चन्द्रादेवी मिश्रीमल संखलेचा की रही। खरतरगच्छाधिपति के सूरि मंत्र की पीठिका के निमित आराधना भवन में प्रतिदिन के रूप में शुक्रवार को प्रातः 06.00 बजे से सांय 06.00 बजे तक अखण्ड नवकार मंत्र का जाप व सांय 08.15 बजे से 09.00 बजे तक दादा गुरूदेव के इक्कतीसा पाठ आयोजन सम्पन्न हुआ। कल रविवार को सुधर्मा प्रवचन वाटिका में 15 वर्ष के ऊपर के बच्चों का दोपहर 02.00 बजे से 04.00 बजे तक भगवान महावीर के शासन के सम्बधिंत प्रतियोगिता रखी गई है,




