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बंगाल की स्कूलों में जूते सप्लाई का टेंडर पास होने का फर्जी ऑर्डर भेजकर 6.99 करोड़ की ठगी

SURAT:पश्चिम बंगाल के स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए जूते सप्लाई करने का 36 करोड़ का टेंडर पास करवा देने का कहकर सूरत मनपा की शिक्षा समिति के पूर्व सदस्य किशोर वाघेला सहित की टोली ने व्यापारी के साथ 6.99 करोड़ की ठगी की थी। इस टोली ने टेंडर मंजूर करवाने के कमीशन के रूप में 2.49 करोड़ रुपये वसूले, जबकि 4.50 करोड़ के लगभग एक लाख जोड़ी जूते भी प्राप्त कर लिए थे।
आर्थिक अपराध निवारण शाखा से मिली जानकारी के अनुसार, मोटा वराछा में यमुना चौक के पास कृष्णा टाउनशिप में प्रवीण भगवानभाई धडुक अपने परिवार के साथ रहते हैं। प्रवीण ‘ड्रीमलैंड शूज’ नाम से सरकारी और अर्धसरकारी स्कूलों तथा कार्यालयों में जूते सप्लाई करते हैं। उन्होंने वर्ष 2013-14 में सूरत महानगरपालिका की शिक्षा समिति में जूते सप्लाई किए थे। उस समय शिक्षा समिति की खरीद समिति के कन्वीनर किशोर वाघेला के साथ उनका परिचय हुआ था।
फरवरी 2023 में वाघेला ने प्रवीणभाई धडुक को अपने घर बुलाया था, जहां वाघेला ने उनकी पहचान सीमिस सुब्रमण्यम नोचील से करवाई थी। धडुक को बताया गया था कि सीमिस के पश्चिम बंगाल सरकार में अच्छे संपर्क हैं। अधिकारियों के साथ उनकी बैठकों के कारण वहां के स्कूलों में जूते सप्लाई का ऑर्डर दिलाया जा सकता है। अच्छा और बड़ा काम मिलने की बात पर धडुक ने हां कर दी।
इसके बाद वाघेला और सीमिस ने धडुक को बताया कि ‘आनंदधारा प्रोजेक्ट’ के तहत वेस्ट बंगाल स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन के नाम से सरकारी जूतों का टेंडर निकाला गया है। यह टेंडर 36 करोड़ का है। टेंडर से जुड़े अधिकारियों के साथ उनकी सेटिंग होने की बात कही गई और कहा गया कि यह टेंडर लेने पर अच्छा आर्थिक लाभ होगा। पुराने संबंधों के कारण धडुक उनकी बातों में आ गए और टेंडर की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को तैयार हो गए।
कुछ समय बाद सीमिस नोचील ने सायन सेन, सुभाशीष सिंह, इंद्रजीत सेनगुप्ता तथा संजीवभाई आदि के साथ धडुक की बातचीत करवाई। बाद में उन्होंने धडुक को टेंडर पास हो जाने की जानकारी दी और उसके दस्तावेज भी भेजे। टेंडर पास होने के बाद धडुक ने विभिन्न साइज़ के जूते तैयार करवाने के लिए वर्क ऑर्डर दे दिया।
दूसरी ओर, किशोर वाघेला एंड कंपनी ने टेंडर पास कराने के नाम पर धडुक से 2.40 करोड़ रुपये कमीशन के रूप में ले लिए। साथ ही धडुक ने वेस्ट बंगाल स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन के तहत 1,00,008 जोड़ी जूते बंगाल भेज दिए। 4.50 करोड़ रुपये के जूते भेजने के बावजूद धडुक को बंगाल सरकार की ओर से भुगतान के रूप में एक भी रुपया नहीं मिला।
जब धडुक ने इस बारे में आरोपियों से बात की, तो उन्होंने सरकारी काम बताकर समय लगने की बात कहकर टाल दिया। इससे शक होने पर धडुक ने बंगाल सरकार में जांच करवाई, जहां से पता चला कि ऐसा कोई टेंडर जारी ही नहीं किया गया था। इसके बाद धडुक ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।
इस मामले में पुलिस ने किशोरकुमार रामुभाई वाघेला (उम्र 55, निवासी ए-13, भाग्यनगर सोसायटी, भिक्षुक गृह के पास, रामनगर, रांदेर, सूरत, मूल निवासी जालिया, तालुका पालिताणा, जिला भावनगर) तथा मूल केरल निवासी सीमिस सुब्रमण्यम नोचील (उम्र 50, निवासी डी/33, शांतिवन रेसिडेंसी, डीडोली खरवासा रोड, डीडोली) को गिरफ्तार किया है।
धडुक को कोलकाता ले जाकर अधिकारियों से मीटिंग कर 16% कमीशन तय किया
वीर नर्मद यूनिवर्सिटी में सिंडिकेट सदस्य रह चुके किशोर वाघेला ने सीमिस नोचील को भागीदार के रूप में परिचित करवाया था। टेंडर के काम के लिए सीमिस धडुक को कोलकाता भी लेकर गया था। 6 मार्च 2023 को कोलकाता में धडुक की मुलाकात अधिकारियों के लायज़निंग पर्सन के रूप में सायन सेन से करवाई गई थी।
सायन सेन उन्हें आनंदधारा, वेस्ट बंगाल स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन के कार्यालय में ले गया, जहां सुभाशीष सिंह की पहचान सरकारी विभाग के मुख्य अधिकारी के रूप में करवाई गई थी। उनके साथ टेंडर के संबंध में चर्चा कर धडुक वापस आ गए थे।
इसके बाद 15 मार्च को उन्हें फिर से कोलकाता बुलाया गया, जहां टेंडर, सप्लाई और कमीशन को लेकर चर्चा हुई। इसमें कुल टेंडर राशि का 16% कमीशन तय किया गया, जिसमें 8% वर्क ऑर्डर देते समय और बाकी 8% ऑर्डर की राशि मिलने के बाद देने की बात तय की गई थी।

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