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मुगलसराय क्षेत्र का नाम अब “तापीपुरा”, मनपा मुख्यालय बना “श्री तापी भवन”

सूरत। सूरत महानगरपालिका की सामान्य सभा में शहर के इतिहास से जुड़े दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सदन ने सेंट्रल जोन स्थित मुगलसराय क्षेत्र का नाम बदलकर “श्री तापीपुरा” तथा महानगरपालिका की मुख्य प्रशासनिक इमारत का नाम “श्री तापी भवन” रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
नगरपालिका के अनुसार सूरत शहर का विकास और समृद्धि काफी हद तक ताप्ती नदी की देन है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ताप्ती नदी को सूर्यपुत्री और शनि देव की बहन माना जाता है, वहीं सूरत के नागरिक इसे “श्री तापी माता” के रूप में श्रद्धा से देखते हैं। शहर की पेयजल व्यवस्था से लेकर उद्योग और व्यापार के विकास तक में ताप्ती नदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
मनपा की मुख्य प्रशासनिक इमारत और उसके आसपास का क्षेत्र लंबे समय से “मुगलसराय” नाम से जाना जाता था, जो मुगल शासनकाल से जुड़ा हुआ था। आजादी के बाद देशभर में कई स्थानों के नाम बदले गए हैं। इसी परंपरा के तहत शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र का नाम “श्री तापीपुरा” रखा गया है।
साथ ही सेंट्रल जोन में स्थित सूरत महानगरपालिका के मुख्यालय, जिसे पहले मुगलसराय भवन के नाम से जाना जाता था, उसे अब आधिकारिक रूप से “श्री तापी भवन” नाम दिया गया है।
सूरत, जिसे प्राचीन काल में सूर्यपुर कहा जाता था, इतिहास में “84 बंदरों का शहर” के रूप में प्रसिद्ध रहा है। यहां से रेशमी कपड़े, जरी उद्योग और जहाज निर्माण का व्यापार चीन, इंडोनेशिया और यूरोप तक होता था। अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी का जहाज “हेक्टर” भी सबसे पहले सूरत के बंदरगाह पर ही आया था।
मनपा का मानना है कि ताप्ती नदी की महिमा और शहर की ऐतिहासिक पहचान को सम्मान देने के लिए यह नाम परिवर्तन किया गया है, जिससे सूरत के गौरवशाली इतिहास को नई पहचान मिलेगी।

स्लम समिति के चेयरमैन विजय चौमाल ने बताया कि देश को स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष के बाद आजादी मिली है, लेकिन कई स्थानों पर अब भी गुलामी के प्रतीक नाम प्रचलन में हैं। इसी सोच के तहत उन्होंने 12 जुलाई 2018 को मनपा सदन में मुगलीसरा भवन का नाम बदलने का प्रस्ताव रखा था। उस समय उन्होंने सूर्यपुर भवन या तापी भवन नाम रखने की मांग की थी।
वर्तमान कार्यकाल की अंतिम बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए मुगलीसरा भवन का नाम आधिकारिक रूप से तापी भवन रखने का निर्णय लिया गया। चौमाल ने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल सहित सभी मंत्रियों, विधायकों, मेयर, डिप्टी मेयर, स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन और शासक पक्ष के नेताओं का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि शहर में जहां भी गुलामी के प्रतीक नाम हैं, उन्हें बदलकर शहर की गरिमा के अनुरूप नाम दिए जाने चाहिए।

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