भाभर की कुमारी कृषी मोदी ने ग्रहस्थ जीवन त्यागकर साध्वी दीक्षा ग्रहण की, भव्य समारोह में उमड़ी हजारों की भीड़

सूरत। शहर के पाल क्षेत्र में आयोजित भव्य दीक्षा समारोह में भाभर के अग्रणी परिवार की पुत्री कुमारी कृषी भरतभाई मोदी ने सांसारिक जीवन का त्याग कर जैन साध्वी दीक्षा ग्रहण की। दीक्षा के बाद उनका नया नाम साध्वी विश्वाय्रमालाश्री रखा गया, जबकि वागड़ निवासी कोकिलाबेन मेहता ने भी दीक्षा लेकर साध्वी कल्पदृष्टिश्री का नाम धारण किया।

पिछले पांच दिनों से सूरत का पाल क्षेत्र मानो पालिताणा जैसा आध्यात्मिक माहौल बन गया था। गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद विजय यशोवर्मसूरिश्वरजी महाराज के सान्निध्य में आयोजित इस समारोह में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। विशाल डोम पंडाल में आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ों साधु-साध्वी और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति से वातावरण धर्ममय हो गया।
दीक्षा समारोह में आचार्य यशोवर्मसूरिश्वरजी महाराज, आचार्य मुक्तिमुनिचंद्रसूरि, आचार्य ललितप्रभसूरि, आचार्य वीरयशसूरि, आचार्य भाग्ययशसूरि, आचार्य दर्शनयशसूरि, आचार्य भव्ययशसूरि, आचार्य ह्रींकारयशसूरि, आचार्य कल्पज्ञसूरि सहित लगभग 200 साधु-साध्वी उपस्थित रहे। समाज के अग्रणी, ट्रस्टी, गणमान्य व्यक्ति और कई जनप्रतिनिधि भी समारोह में शामिल हुए।

दीक्षा से पूर्व विदाई समारोह में कुमारी कृषी मोदी ने भावुक शब्दों में कहा कि उनके दादा की वर्षों पुरानी इच्छा थी कि परिवार से कोई सदस्य दीक्षा मार्ग अपनाए। यह सौभाग्य उन्हें मिला है। आधुनिक जीवन की सुविधाओं और आकर्षण को छोड़कर उन्होंने आत्म साधना का मार्ग चुना।
दीक्षा के दौरान जब उन्होंने एक-एक कर आभूषण उतारकर संसार का त्याग किया तो पूरा पंडाल भावुक हो उठा। दीक्षा के बाद शाम 6 बजे साध्वीजी का प्रथम विहार सूरत के सोमेश्वर-वेसु की ओर हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने भावभीनी विदाई दी।
9 मार्च को वेसु स्थित जोली रेसिडेंसी में प्रवचन और वार्षिक चढ़ावा कार्यक्रम आयोजित होगा तथा 10 मार्च को वेसु में घर मंदिर की प्रतिष्ठा होगी। इसके बाद 12 मार्च को साधु-साध्वी संघ मुंबई की ओर विहार करेगा।



