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मूल्यों, मर्यादाओं और सभ्यताओं का संरक्षण ही सच्ची मानवता: पू. पद्मदर्शन सूरीजी

नवसारी। माणेकलाल रोड स्थित श्री मुनिसुव्रत स्वामी जिनालय के समीप क्रिस्टल पेलैस अपार्टमेंट में मातृश्री सीताबेन कांतिलाल शाह अनावलवाला परिवार के निवास पर जैनाचार्य पद्मदर्शन सूरीजी महाराज आदि श्रमण वृंद का आचार्य पद प्राप्ति के बाद प्रथम मंगल प्रवेश अत्यंत भव्य रूप से संपन्न हुआ। ढोल-नगाड़ों और जयघोष के बीच हुए सामैय्या में बड़ी संख्या में गुरु भक्तों की उपस्थिति रही। अक्षत से नव नियुक्त आचार्यश्री का अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर आयोजित सत्संग सभा में पूज्यश्री ने लगभग एक घंटे तक ओजस्वी एवं मार्मिक प्रवचन दिया। प्रवचन के पश्चात लाभार्थी परिवार द्वारा गौतम प्रसादी (नवकारशी) का लाभ लिया गया। उपस्थित श्रद्धालु प्रवचन श्रवण कर मंत्रमुग्ध हो गए। अंत में पूज्यश्री ने सभी को मंगल आशीर्वाद प्रदान किए।
“कर्म कुंडली को देखो, जन्म कुंडली को नहीं”
अपने उद्बोधन में आचार्यश्री ने कहा कि “जो व्यक्ति मूल्यों, मर्यादाओं और सभ्यताओं का संरक्षण करता है, वही सच्चा मनुष्य कहलाता है।” उन्होंने मानव जीवन में सद्गुणों के संवर्धन और संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि व्यक्ति को सदैव कर्तव्य पथ पर जागरूक रहना चाहिए और पाप कर्मों से दूर भागना चाहिए। आदर्शों का दर्पण सदैव अपनी दृष्टि के सामने रखना आवश्यक है।
उन्होंने वर्तमान समय में तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि तकनीक ने जितने लाभ दिए हैं, उससे अधिक हानि भी पहुंचाई है। ए.आई. के प्रवेश से लाखों लोगों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, जिससे गरीबी और बेरोजगारी बढ़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति पर यंत्रवाद ने गहरा प्रहार किया है और दया, करुणा, नम्रता एवं औचित्य जैसे गुण लुप्त होते जा रहे हैं।
आचार्यश्री ने संदेश दिया कि जन्म कुंडली के बजाय कर्म कुंडली पर ध्यान देना चाहिए। जीवन में किए गए सत्कर्म ही हमारे साथ जाते हैं। सत्ता, संपत्ति, सौंदर्य और शक्ति श्मशान तक सीमित हैं, जबकि संस्कारों का खजाना जन्म-जन्मांतर तक साथ रहता है।
ज्ञातव्य है कि पूज्यश्री 20 फरवरी को सालेज, 21 फरवरी को गणदेवी तथा 22 से 24 फरवरी तक बिलीमोरा स्थित गौहरबाग जैन संघ में स्थिरता करेंगे।

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