संविधान के प्रति रहे जागरूकता – युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण
गणतंत्र दिवस पर शांतिदूत से आशीर्वाद ग्रहण करने पहुंची पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे

— प्रवचन सभा में गुरुदेव ने अभय रहने हेतु किया प्रेरित- ज्ञानार्थियों द्वारा श्रद्धामय अभिवन्दना प्रस्तुति
26 जनवरी 2026, सोमवार, छोटी खाटू, डीडवाना कुचामन (राजस्थान)युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की पावन सन्निधि से छोटी खाटू ग्राम में उत्सव का सा माहौल छाया हुआ है। मर्यादा महोत्सव के त्रि दिवसीय समारोह की संपन्नता के बाद भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रावक समाज गुरुदेव की उपासना हेतु देश के कोने कोने से पहुंचा हुआ है। आज गणतंत्र दिवस पर गुरुदेव की सन्निधि में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री भाजपा नेता वसुंधरा राजे दर्शनार्थ पहुंची एवं आचार्य प्रवर से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। पूर्व में भी अनेकों बार वसुंधरा जी गुरूदेव की सन्निधि में पहुंची है। इस अवसर पर गुरूदेव से समसामयिक विषयों पर चर्चा हुई और पूर्व मुख्यमंत्री ने मार्गदर्शन प्राप्त किया। छोटी खाटू मर्यादा महोत्सव व्यवस्था समिति के पदाधिकारियों द्वारा भाजपा नेता का साहित्य आदि से सम्मान किया गया।
मंगल प्रवचन में धर्म देशना फरमाते हुए गुरुदेव ने कहा – व्यक्ति के भीतर में भय की संज्ञा होती है। मोहनीय कर्म का ही एक अंग-उपांग यह भय संज्ञा है। यह भय की संज्ञा एक दुर्बलता पैदा करने वाली या दुर्बलता युक्त है। आठ आत्माएं हैं, उनमें एक कषाय आत्मा ही ऐसी है संभवत जो नितांत सावद्य है। कषाय आत्मा निर्वध्य है ही नहीं, एकांत अशुभ है, एकांत सावद्य है। भय है वह चारित्र मोहनीय के परिवार के अंतर्गत है और यह भय संज्ञा आदमी में भी कई बार उभरती है और भी प्राणियों में भय संज्ञा उभरती है। जैन वांगमय में कहा गया ‘नमो जीणाणं जिभयाणं’। अर्थात उन जिनों को, वीतरागों को, तीर्थंकरों को नमस्कार है जिन्होंने भय को जीत लिया। जो तीर्थंकर हैं, सिद्ध हैं वे पूर्णतया निर्भय-अभय होते हैं। व्यक्ति को अभय रहना चाहिए। हालांकि कठिन बात है कभी कभी डर लगने लग जाता है, तो एक काम करो डराओ तो मत किसी को। डरना तो थोड़ी हाथ की बात नहीं, भय लगने लगता है, पर डराना तो हाथ की बात है। व्यक्ति किसी में भय पैदा न करे। अभय के मैं दो अर्थ करता हूं कि डरना नहीं और डराना नहीं।
आगे सप्त व्यसनों के बारे में बताते हुए गुरुदेव ने कहा कि जब भय लगे तो कुछ आलंबन ले, पाठ करें। भगवान का नाम ले कि थोड़ा पौरुष जाग जाए। जैसे स्वामी जी का नाम हमारे यहां चलता है ‘ओम भिक्षु जय भिक्षु’। ऐसा कोई हम नाम स्मरण करके भी अपने भीतर थोड़ा भय की जगह अभय को स्थापित करने का प्रयास कर सकते हैं।
आज 26 जनवरी है, गणतंत्र दिवस है। 15 अगस्त और 26 जनवरी भारत की दृष्टि से यह दोनों महत्वपूर्ण दिवस है। स्वतंत्रता मिलना एक बात है, फिर स्वतंत्रता का अच्छा उपयोग होना चाहिए। गणतंत्र का यह विधान, मर्यादा। संविधान अपने आप में विशेष है। संविधान के प्रति जागरूकता रहनी चाहिए। अभी हमने मर्यादा महोत्सव भी मनाया। मर्यादाओं के प्रति हमारे मन में जागरूकता रहे, निष्ठा रहे।
इस अवसर पर कार्यक्रम में मुनि तन्मय कुमार जी ने अपने विचारों की प्रस्तुति दी। श्री सिद्धार्थ यश कोचर, महेंद्र कोचर, तेरापंथ महिला मंडल मंत्री श्रीमती पूजा सेठिया, श्रीमती नीलम सेठिया ने श्रद्धाभाव व्यक्त किया। छोटी खाटू ज्ञानशाला की प्रशिक्षिकाओं एवं ज्ञानार्थियों ने प्रस्तुति दी।




