
नई दिल्ली। भारत सरकार द्वारा एमएसएमई निर्यातकों के लिए प्री और पोस्ट शिपमेंट एक्सपोर्ट क्रेडिट पर 2.75 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी देने की ऐतिहासिक घोषणा का कैट की कपड़ा एवं गारमेंट समिति ने जोरदार स्वागत किया है। कैट का कहना है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच यह फैसला देश के कपड़ा, गारमेंट, एपैरल और मेड-अप्स सेक्टर को नई गति और प्रतिस्पर्धात्मक मजबूती देगा।
कैट कपड़ा एवं गारमेंट समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष चम्पालाल बोथरा ने कहा कि लंबे समय से ऊँची ब्याज दरें छोटे और मध्यम गारमेंट निर्यातकों के लिए बड़ी बाधा बनी हुई थीं। 2.75 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी से न केवल कार्यशील पूंजी सस्ती होगी, बल्कि उत्पादन लागत घटेगी और भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत प्री-शिपमेंट और पोस्ट-शिपमेंट दोनों पर ब्याज में राहत सीधे (Upfront) मिलेगी, जिससे निर्यातकों की लिक्विडिटी बढ़ेगी। योजना की अधिकतम सीमा ₹50 लाख प्रति वर्ष तय की गई है, जिससे छोटे निर्यातकों को सीधा लाभ मिलेगा।
कैट ने इस अवसर पर सरकार से यह भी माँग दोहराई कि सूरत, तिरुपुर और लुधियाना जैसे प्रमुख कपड़ा केंद्रों को ‘डेडिकेटेड गारमेंट एक्सपोर्ट हब’ के रूप में विकसित किया जाए। ऐसे हब बनने से निर्यात से जुड़ी दस्तावेज़ी प्रक्रिया और अनुपालन सरल होंगे, छोटे व्यापारियों व स्टार्ट-अप्स को सीधे विदेशी बाजारों से जुड़ने का अवसर मिलेगा और स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होंगे।
चम्पालाल बोथरा ने कहा कि 2.75 प्रतिशत की ब्याज सहायता छोटे उद्यमों को चीन और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले वैश्विक बाजार में मजबूती से खड़े होने की वास्तविक ताकत देगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस योजना को दीर्घकालिक नीति का रूप दिया जाए और सूरत जैसे शहरों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से युक्त एक्सपोर्ट क्लस्टर्स विकसित किए जाएँ।
कैट की प्रमुख माँगों में ब्याज सब्सिडी योजना को कम से कम पाँच वर्षों के लिए स्थायी करना, कपड़ा क्लस्टर्स के लिए अलग ‘एक्सपोर्ट हब’ नीति लागू करना तथा महिला उद्यमियों और नए एमएसएमई स्टार्ट-अप्स को अतिरिक्त एक प्रतिशत विशेष प्रोत्साहन देना शामिल है।




