
सूरत।पुणा क्षेत्र में वसीयतनामे की जानकारी होने के बावजूद पड़ोसी के साथ फ्लैट का सौदा कर 25.51 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में अदालत ने आरोपी मां, पुत्र और पुत्रवधू की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।
मामले का विवरण अनुसार, पुणा क्षेत्र के मागोब स्थित अभिषेक रेसिडेंसी विंग-1 में रहने वाले मनोहरलाल मोहनलाल राठी उसी इमारत के फ्लैट नंबर डी-201 में रहने वाले बसंतीलाल जैन और उनकी पत्नी पूर्णिमादेवी के पड़ोसी हैं। वर्ष 2024 में बसंतीलाल जैन के निधन के बाद उनके पुत्र मनोज जैन ने उक्त फ्लैट बेचने की इच्छा जताई, जिस पर मनोहरलाल राठी ने 88.51 लाख रुपये में फ्लैट खरीदने का सौदा तय किया था। सौदे के तहत 51 हजार रुपये बयाना दिया गया और 4 सितंबर 2024 तक किस्तों में कुल 25.51 लाख रुपये पूर्णिमादेवी, मनोज जैन तथा मनोज की पत्नी सुनीता के खातों में ट्रांसफर किए गए थे।
इसके बाद शेष राशि के लिए लोन प्रक्रिया शुरू करने के उद्देश्य से मनोज जैन ने फ्लैट के दस्तावेज मनोहरलाल राठी को सौंपे। दस्तावेजों की जांच के दौरान एक वसीयतनामा सामने आया, जिसमें फ्लैट के मूल मालिक बसंतीलाल जैन और पूर्णिमादेवी द्वारा फ्लैट का 50 प्रतिशत हिस्सा अपने दूसरे पुत्र सुनीलकुमार और उसकी पत्नी रचना के नाम किए जाने का उल्लेख था। इस पर सवाल उठाने पर मनोज जैन ने वसीयतनामे को गलत बताते हुए भरोसा दिलाया कि फ्लैट उन्हीं को बेचा जाएगा।
दस्तावेजों पर संदेह होने के चलते मनोहरलाल राठी ने सौदा रद्द करने का निर्णय लिया और मनोज जैन ने दिसंबर 2024 के अंत तक प्राप्त 25.51 लाख रुपये लौटाने का आश्वासन दिया। इसके बावजूद रकम वापस नहीं की गई और आरोपी फरार हो गए, जिसके बाद पुणा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने पूर्णिमादेवी, मनोज जैन और सुनीता के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया।
गिरफ्तारी से बचने के लिए तीनों आरोपियों ने अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील आर.पी. डोबरिया तथा मूल शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता जिग्नेश हिंगु, विवेक हिंगु और प्रदीप डेरे ने जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।




