रांदेर की 7 वर्षीय जैन बच्ची का दीक्षा समारोह फिलहाल स्थगित
माता-पिता के बीच विवाद, पिता की आपत्ति के बाद मां ने अदालत में शपथपत्र देकर दी स्थगन की गारंटी

सूरत।रांदेर क्षेत्र की सात वर्षीय जैन बच्ची को दीक्षा दिलाने के मामले में एक अहम मोड़ सामने आया है। माता-पिता के बीच चल रहे पारिवारिक विवाद और पिता की ओर से दीक्षा रोकने की याचिका दायर किए जाने के बाद प्रस्तावित दीक्षा समारोह को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। सुनवाई के दौरान बच्ची की मां ने अदालत में स्वयं उपस्थित होकर शपथपत्र प्रस्तुत किया, जिसमें लिखित रूप से आश्वासन दिया गया कि बच्ची का दीक्षा समारोह अभी आयोजित नहीं किया जाएगा।
मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने पिता द्वारा दायर दीक्षा पर रोक और बच्ची की स्थायी कस्टडी से संबंधित याचिकाओं पर अगली सुनवाई के लिए 2 जनवरी की तारीख तय की है। उस दिन दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत अंतिम निर्णय लेगी।
प्रकरण के अनुसार, रांदेर के पालनपुर पाटिया क्षेत्र में रहने वाले एक जैन परिवार में पति-पत्नी के बीच लंबे समय से मतभेद चल रहे हैं। दोनों के एक पुत्र और एक पुत्री हैं, जिनमें पुत्री की उम्र सात वर्ष और पुत्र की उम्र पांच वर्ष है। विवाद के चलते मां दोनों बच्चों के साथ अपने मायके में रह रही थी। इसी दौरान मां ने बड़ी बेटी को दीक्षा दिलाने का निर्णय लिया। पिता ने इसका विरोध करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया और कहा कि उनकी सहमति के बिना नाबालिग बच्ची को दीक्षा दिलाना उसके भविष्य के लिए गंभीर निर्णय है।
सोमवार की सुनवाई में मां की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत में शपथपत्र देकर स्पष्ट किया कि दीक्षा समारोह को स्थगित कर दिया गया है और भविष्य में भी ऐसा कोई आयोजन नहीं किया जाएगा। इस लिखित आश्वासन के बाद अदालत ने दोनों याचिकाओं की सुनवाई 2 जनवरी तक के लिए टाल दी।
गौरतलब है कि इससे पहले भी सूरत की इसी अदालत ने करीब छह माह पूर्व एक 12 वर्षीय बच्चे के दीक्षा समारोह पर रोक लगाई थी। उस मामले में अदालत ने स्पष्ट कहा था कि नाबालिग बच्चे के जीवन से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय में माता-पिता दोनों की सहमति आवश्यक है और कानून सामाजिक परंपराओं से ऊपर है




