पुरुषादानीय हैं भगवान पार्श्वनाथ : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण
माण्डा की धरा पर उदित हुए तेरापंथ धर्मसंघ के महासूर्य महाश्रमण

-सिरियारी से गतिमान हुए शांतिदूत, माण्डावासियों ने किया भावभीना अभिनंदन
-माण्डावासियों ने अपने आराध्य के स्वागत में दी श्रद्धाभिव्यक्ति
14.12.2025, रविवार, माण्डा, पाली (राजस्थान) :जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के आद्य अनुशास्ता, प्रवर्तक महामना आचार्यश्री भिक्षु की महाप्रयाण स्थली सिरियारी समाधि स्थल में द्विदिवसीय मंगल प्रवास करने के उपरान्त जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी रविवार को प्रातः की मंगल बेला में सिरियारी से पुनः गतिमान हुए। सिरियारी की जनता को मंगल आशीष प्रदान करते हुए आचार्यश्री आगे बढ़े तो सर्दी का प्रभाव दिखाई दे रहा था। मार्ग में अनेक स्थान पर लोगों ने आचार्यश्री के दर्शन किए तो आचार्यश्री ने उन्हें मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। सूर्य के आसमान में चढ़ने के साथ-साथ सर्दी का प्रभाव भी कम होता दिखाई दे रहा था।

मार्ग में आचार्यश्री अपनी धवल सेना के निम्बली गांव में भी पधारे। वहां विद्यालय के विद्यार्थियों ने भी आचार्यश्री के दर्शन किए तो शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने विद्यार्थियों को पावन प्रतिबोध प्रदान किया। वहां के लोगों को मंगल आशीर्वाद प्रदान कर आगे बढ़ चले। मांडा गांव निवासी श्रद्धालु अपने आराध्य के अभिनंदन के लिए उत्साहपूर्वक प्रतीक्षा कर रहे थे। आचार्यश्री जैसे मांडा गांव के निकट पधारे तो श्रद्धालुओं ने बुलन्द जयघोष के साथ अपने अनुशास्ता का भावभीना स्वागत किया। भव्य स्वागत जुलूस के साथ आचार्यश्री माण्डा गांव निवासी श्री प्यारेलाल पितलिया के निवास स्थान श्री महाश्रमण कुटीर में पधारे। आचार्यश्री की इस कृपा को प्राप्त कर मानों पितलिया परिवार धन्यता की अनुभूति कर रहा था।
मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रद्धालु जनता को युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि जैन परंपरा में चौबीस तीर्थंकरों की बात बताई गई है। वर्तमान अवसर्पिणी में तेईसवें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ हुए। आज पौष कृष्णा दसमी को पार्श्व जयंती मनाई जाती है। भगवान पार्श्व की लोकप्रियता काफी नजर आती है। भगवान पार्श्व को पुरुषादानीय अलंकरण से अलंकृत किया गया है। जितने मंदिर भगवान पार्श्व के मिलते हैं, उतने अन्य तीर्थंकरों के उतने नहीं मिलते हैं। उनके मंत्र, स्तोत्र आदि भी बहुत मिलते हैं।

आज उनकी जयंती हैं। दुनिया में विशिष्ट महापुरुष समय-समय पर पैदा होते रहते हैं। यह दुनिया का मानों भाग्य होता है। भगवान पार्श्वनाथ या अन्य तीर्थंकरों की वाणी ग्रन्थ बन जाते हैं। उनकी वाणी से कितनों का कल्याण हो सकता है। आचार्यश्री ने उनकी स्तुति में ‘प्रभु पार्श्व देव चरणों में शत-शत प्रणाम हो’ गीत का आंशिक संगान किया।आज के दिन हमारा माण्डा गांव में आना हुआ है। आचार्यश्री भिक्षु से भी जुड़ा हुआ है और आशोजी से किसी रूप में जुड़ा हुआ है। यहां के लोगों में और यहां के बाहर रहने वाले लोगों में धर्म का प्रभाव बना रहे, सभी लोगों में खूब धार्मिक भावना बनी रहे।

आचार्यश्री के स्वागत में सर्वप्रथम माण्डा निवासी श्री प्यारेलाल पितलिया ने अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी। स्थानीय सरपंच श्री कालूरामजी, उपसरपंच श्री हरी सिंह, पूर्व सरपंच श्री रणजीत सिंह ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ महिला मण्डल ने स्वागत गीत का संगान किया। नारकोटिक्स कन्ट्रोल ब्यूरो अतिरिक्त श्री नरपतसिंह ने भी आचार्यश्री के स्वागत में अपनी अभिव्यक्ति दी। श्रीमती पिंकी पितलिया,, श्री प्रदीप पितलिया ने आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी।



