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“मन को स्वच्छ किए बिना जीवन में शांति संभव नहीं”-जैनाचार्य पद्मदर्शनसूरि महाराज

सूरत।अठवालाइंस श्री मुनीपुरी जैन संघ में आयोजित प्रवचन सभा में जैनाचार्य पूज्य पद्मदर्शनसूरि महाराज ने अमृतवाणी प्रकट करते हुए कहा कि आज अभाव का दुःख कम और अल्पता का दुःख अधिक महसूस किया जा रहा है। जीवन में शांति चाहिए तो समाधान ही सर्वोत्तम मार्ग है, क्योंकि समाधान के बिना समाधि प्राप्त नहीं हो सकती।
उन्होंने बताया कि आज मनुष्य हर क्षेत्र में विचलित है। ऐसा नहीं कि पहले परिस्थितियाँ बिल्कुल अच्छी थीं और अब ही खराब हुई हैं। इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि लेबनॉन की भूमि से तीन हजार वर्ष पुराना एक घड़ा मिला, जिस पर लिखा था— “तौबा है आज के लड़कों से।” उस समय न टेलीफोन था, न टीवी, न धारावाहिक, फिर भी ऐसी शिकायतें थीं। इसलिए आज की परिस्थितियों में व्याकुल होने की जरूरत नहीं, बल्कि मन को शांत रखने की आवश्यकता है।

आचार्यश्री ने कहा कि आज के समय में परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं, ऐसे में शांत रहना अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा जीवन में सुख सिर्फ सपनों में ही रहेगा। सुखी बनने के लिए सबको अपना मानें, किसी को अलग न करें।“जोड़ने का कार्य करें, तोड़ने का नहीं।”
उन्होंने कहा कि परिस्थिति का रोना रोने से कुछ नहीं होगा। यदि मन से आपका संबंध टूट गया, तो जीवन में स्थिरता संभव नहीं।
आचार्यश्री ने समझाया कि तन की जितनी देखभाल की जाती है, उससे अधिक मन की सफाई जरूरी है, क्योंकि मन ही स्वर्ग भी बनाता है और मन ही नर्क भी। यदि जीवन में खुशियाँ लानी हों तो मन के मोबाइल में अच्छी बातों को ‘स्टोर’ करें और गलत बातों को ‘डिलीट’ करना सीखें।

उन्होंने कहा कि गलत घटनाओं को जीवन में कब तक संजोकर रखेंगे? जैसे समाज में स्वच्छता अभियान चलाया जाता है, वैसे ही मन की सफाई भी आवश्यक है। “हमें बाहर का कचरा तो दिखता है, लेकिन अंदर का कचरा नहीं दिखता।”
मन की मलिनता दूर होगी तो जीवन में शांति, स्वास्थ्य और आनंद का त्रिवेणी संगम अवश्य बनेगा।
सभा में बड़ी संख्या में भक्तों ने उपस्थित रहकर आचार्यश्री के प्रेरणादायी विचारों का लाभ लिया।

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